देश के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल चाकूरकर का शनिवार सुबह महाराष्ट्र के लातूर में निधन हो गया। 91 वर्ष के पाटिल लंबे समय से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे और पिछले कुछ महीनों से घर पर ही उनका उपचार चल रहा था। उनके निधन की खबर सामने आते ही लातूर सहित पूरे राजनीतिक क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई।
लंबी राजनीतिक पारी और केंद्रीय राजनीति में मजबूत पहचान
शिवराज पाटिल चाकूरकर ने मराठवाड़ा की राजनीति से शुरुआत करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान बनाई। 1973 से 1980 तक वे लातूर ग्रामीण के विधायक रहे। इसके बाद उन्होंने 1980 में लोकसभा में प्रवेश किया और केंद्र की राजनीति में सक्रिय हो गए। पाटिल ने लातूर लोकसभा क्षेत्र से कुल सात बार जीत हासिल की, जो उनकी लोकप्रियता और संगठनात्मक पकड़ को दर्शाता है।
वे लोकसभा के सभापति के रूप में भी कार्य कर चुके थे और विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। कांग्रेस के भीतर उन्हें अनुशासित, शांत स्वभाव और सादगीपूर्ण जीवनशैली के लिए जाना जाता था।
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मुंबई हमले के बाद दिया था इस्तीफा
साल 2004 में UPA सरकार के दौरान पाटिल को देश का गृह मंत्री नियुक्त किया गया। 26/11 मुंबई आतंकी हमले के समय वे इस पद पर थे। हमले के बाद सुरक्षा चूक को लेकर उनकी कड़ी आलोचना हुई और उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए गृह मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
लातूर में जुटने लगे लोग, घर पर सुरक्षा बढ़ाई गई
सुबह निधन की खबर मिलते ही लातूर स्थित उनके आवास ‘देववर’ पर भारी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक पहुंचने लगे। स्थानीय प्रशासन ने भीड़ को देखते हुए पुलिस बल तैनात किया है। लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए घर के बाहर शांति से इंतजार करते दिखे।
राजनीति जगत में शोक संदेश
कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत सहित कई नेताओं ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। भगत ने कहा कि शिवराज पाटिल का राजनीतिक जीवन अनुशासन और संतुलित नेतृत्व का उदाहरण था। उन्होंने दिवंगत नेता के परिवार को इस कठिन समय में शक्ति देने की प्रार्थना की।
पाटिल चाकूरकर अपने पीछे एक लंबी राजनीतिक विरासत, सादगी भरी छवि और श्रेष्ठ संसदीय परंपराओं को निभाने का इतिहास छोड़ गए हैं।

