जयपुर। साइबर अपराधियों ने अब लोगों को ठगने का नया तरीका खोज लिया है। वे खुद को प्रसिद्ध ब्रांड्स के अधिकृत प्रतिनिधि बताकर डीलरशिप या फ्रैंचाइजी दिलाने का झांसा देते हैं और लोगों से रजिस्ट्रेशन फीस, सिक्योरिटी डिपॉजिट और एनओसी चार्ज के नाम पर लाखों रुपये हड़प लेते हैं। जैसे ही रकम जमा होती है, ठग अपने मोबाइल नंबर और ईमेल बंद कर देते हैं, जिससे पीड़ित को ठगी का एहसास तब होता है जब बहुत देर हो चुकी होती है।
झूठे ऑफर और तुरंत फैसला लेने का दबाव
राजस्थान पुलिस ने इस बढ़ते खतरे को देखते हुए राज्यभर में साइबर फ्रॉड अलर्ट जारी किया है। पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के निर्देशन में साइबर क्राइम शाखा के अतिरिक्त महानिदेशक वी.के. सिंह और डीआईजी विकास शर्मा के नेतृत्व में यह चेतावनी जारी की गई।
डीआईजी विकास शर्मा ने बताया कि ठग अक्सर खुद को कंपनी का वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं और सीमित समय का हवाला देकर व्यक्ति पर तुरंत भुगतान का दबाव बनाते हैं। पैसे ट्रांसफर होते ही वे संपर्क तोड़ देते हैं।
झुंझुनूं में पकड़ा गया फ्रैंचाइजी ठगी गैंग
राजस्थान में इस तरह की ठगी का मामला हाल ही में झुंझुनूं जिले में सामने आया, जहां तीन लोगों को आधार कार्ड फ्रैंचाइजी के नाम पर लोगों से ठगी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। आरोपी खुद को अधिकृत सेवा प्रदाता बताते थे और खासतौर पर राजस्थान के बाहर के लोगों को निशाना बना रहे थे।
ठगों का काम करने का तरीका
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संपर्क साधना: कॉल, ईमेल या सोशल मीडिया के माध्यम से बातचीत शुरू करना।
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लालच देना: डीलरशिप और उच्च मुनाफे वाले ऑफर दिखाना।
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दबाव बनाना: सीमित सीटों या आखिरी मौके का बहाना बनाकर तुरंत पैसे की मांग करना।
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पैसे लेना: रजिस्ट्रेशन या सिक्योरिटी के नाम पर रकम बैंक खाते में ट्रांसफर करवाना।
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गायब होना: भुगतान मिलते ही कॉल और ईमेल बंद कर देना।
ठगी से बचने के लिए राजस्थान पुलिस की सलाह
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हमेशा ब्रांड की आधिकारिक वेबसाइट से ही डीलरशिप की जानकारी लें।
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किसी भी कॉल या ईमेल की पुष्टि कंपनी के कस्टमर केयर या हेड ऑफिस से करें।
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केवल आधिकारिक डोमेन वाले ईमेल आईडी पर ही भरोसा करें।
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किसी भी प्रकार की फीस देने से पहले कंपनी के रजिस्टर्ड कार्यालय का दौरा करें।
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भुगतान कंपनी के नाम वाले खाते में ही करें, व्यक्तिगत खातों में नहीं।
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कोई ऑफर यदि बहुत अच्छा लगे, तो उसे संदेह की दृष्टि से देखें।
ठगी हो जाए तो तुरंत करें ये कदम
यदि आप साइबर ठगी का शिकार हो जाते हैं, तो तुरंत:
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बैंक को सूचित करें ताकि ट्रांजेक्शन रोका जा सके।
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निकटतम पुलिस स्टेशन या साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराएं।
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भारत सरकार के पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत करें।
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साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 या राजस्थान पुलिस हेल्पडेस्क 9256001930, 9257510100 पर कॉल करें।
विशेषज्ञों की राय
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि फर्जी डीलरशिप और फ्रैंचाइजी स्कैम तेजी से बढ़ रहे हैं। इनसे बचने का सबसे प्रभावी तरीका है सावधानी, जांच और सत्यापन। जितनी तेजी से ठग तकनीक का उपयोग कर रहे हैं, उतनी ही तेजी से जनता को भी सतर्क रहना जरूरी है।
