उपराष्ट्रपति चुनाव में एनडीए का दबदबा, विपक्षी गठबंधन को संख्या में पिछड़ने का नुकसान
नई दिल्ली: देश के नए उपराष्ट्रपति के चुनाव के लिए मतदान प्रक्रिया आज सुबह 10 बजे शुरू हुई, जिसमें संसद के दोनों सदनों के कुल 781 में से 767 सांसदों ने हिस्सा लिया। इस बार मुकाबला एनडीए के उम्मीदवार और महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन तथा विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन के बी. सुदर्शन रेड्डी के बीच है। एनडीए के पास बहुमत से अधिक समर्थन होने के कारण राधाकृष्णन की जीत लगभग तय मानी जा रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद भवन पहुंचकर सबसे पहले मतदान किया। उनके बाद एक-एक करके तमाम वरिष्ठ सांसदों और मंत्रियों ने अपना वोट डाला। भाजपा सांसदों और सहयोगी दलों के बीच जबरदस्त उत्साह देखा गया। इस दौरान प्रधानमंत्री संसद से रवाना होते समय मीडिया से बिना बातचीत के निकल गए।
चुनाव से पहले राम मंदिर में दर्शन कर राधाकृष्णन ने दिखाई आस्था
मतदान से पहले एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन लोधी कॉलोनी स्थित श्रीराम मंदिर पहुंचे और पूजा-अर्चना की। इस धार्मिक आस्था को उन्होंने अपनी सफलता का आशीर्वाद बताया। उन्होंने कहा, “मैं राष्ट्र सेवा के इस अवसर को ईश्वर की कृपा मानता हूं और देश के विकास के लिए प्रतिबद्ध हूं।”
एनडीए को समर्थन देने में दिखा एकजुटता, विपक्ष में खींचतान
भाजपा नेताओं और एनडीए सहयोगी दलों ने राधाकृष्णन की जीत को लेकर पूरा विश्वास जताया है। राज्यसभा सांसद रामभाई मोकारिया ने कहा कि यह चुनाव केवल औपचारिकता भर रह गया है क्योंकि सीपी राधाकृष्णन की जीत सुनिश्चित है। सांसद मेधा कुलकर्णी ने कहा, “यह चुनाव हमारे लिए गौरव का क्षण है। एनडीए पूरी रणनीति के साथ मैदान में उतरा है और परिणाम स्पष्ट रूप से हमारे पक्ष में रहेगा।”
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तीन पार्टियों ने बनाई दूरी, विपक्ष की उम्मीदों को झटका
बीजू जनता दल (BJD), भारत राष्ट्र समिति (BRS) और शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने मतदान प्रक्रिया से दूरी बना ली है। इन दलों ने स्पष्ट किया कि वे न तो एनडीए और न ही ‘इंडिया’ ब्लॉक के पक्ष में मतदान करेंगे। इन तीनों पार्टियों के पास कुल 14 सांसद हैं, जिनकी अनुपस्थिति के चलते कुल मतदाता संख्या घटकर 767 रह गई है।
संख्याबल में एनडीए की स्पष्ट बढ़त
संसद के दोनों सदनों में वर्तमान में कुल 781 सांसद हैं, लेकिन 14 सांसदों के मतदान से बाहर रहने के कारण कुल 767 वोट ही डाले जाएंगे। बहुमत के लिए कम से कम 384 वोटों की आवश्यकता है। एनडीए के पास पहले से ही 427 सांसदों का समर्थन है, जो बहुमत से काफी अधिक है। वहीं, विपक्ष के पास केवल 355 सांसद हैं, जिससे उनके उम्मीदवार की जीत की संभावना बेहद कम हो गई है।
निष्कर्ष: उपराष्ट्रपति पद पर एनडीए की मजबूत पकड़
इस उपराष्ट्रपति चुनाव में एनडीए की रणनीति, संख्याबल और गठबंधन की एकजुटता के चलते विपक्ष को बड़ा झटका लगा है। मतदान के रुझानों और समीकरणों को देखते हुए यह स्पष्ट है कि सीपी राधाकृष्णन देश के नए उपराष्ट्रपति बनने जा रहे हैं। विपक्ष के पास न तो पर्याप्त संख्या है और न ही मतदाता एकजुटता, जिससे उनकी उम्मीदें लगभग समाप्त हो चुकी हैं।
