बीकानेर में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया से जुड़े भूमि अधिग्रहण मामले में अदालत ने किसान महिला मंजू देवी के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रेणु सिंगला ने माना कि मुआवजा भुगतान में करीब पांच साल की देरी की गई।
मामला राष्ट्रीय राजमार्ग-15 के विस्तार के लिए अधिग्रहित भूमि से जुड़ा है। वर्ष 2018 में अवॉर्ड जारी होने के बावजूद 10.83 लाख रुपए का मुआवजा मार्च 2023 में दिया गया।
कोर्ट ने कहा कि भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के अनुसार, समय पर भुगतान नहीं होने पर प्रभावित व्यक्ति को ब्याज का अधिकार है। मंजू देवी ने बताया कि उनकी 0.136 हेक्टेयर कृषि भूमि का अधिग्रहण किया गया था, लेकिन कई शिकायतों के बाद भी समय पर भुगतान नहीं हुआ।
अदालत ने पाया कि देरी के लिए किसान को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता और विभाग ने कोई उचित नोटिस भी जारी नहीं किया था।
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कोर्ट ने आदेश दिया कि मंजू देवी को 1 जून 2018 से 10 मार्च 2023 तक की अवधि के लिए 7.76 लाख रुपए ब्याज के रूप में दिए जाएं। साथ ही इस राशि पर आगे भी 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का निर्देश दिया गया है जब तक पूरी वसूली नहीं हो जाती।
