नेपाल में राजनीतिक संकट गहराया, ओली सरकार पर मंडराया गिरने का खतरा
काठमांडू। नेपाल इन दिनों एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक संकट से गुजर रहा है। राजधानी काठमांडू से लेकर पोखरा तक देश के प्रमुख शहर हिंसा की चपेट में हैं। इस बीच प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार पर संकट के बादल और गहरा गए हैं। नेपाली कांग्रेस ने अपने सभी मंत्रियों से इस्तीफा दिलवा दिया है, जिससे गठबंधन सरकार के टूटने का खतरा वास्तविकता में बदलता दिख रहा है।
PM आवास के बाहर चली गोली, दो लोग घायल
शुक्रवार को भक्तपुर के बालकोट स्थित पीएम ओली के निजी आवास के पास गोली चलने की घटना हुई। इस हमले में दो लोग घायल हुए हैं। बढ़ते तनाव के बीच पीएम ओली ने ऑल पार्टी मीटिंग बुलाई है और देश में शांति बनाए रखने की अपील की है।
राष्ट्रपति आवास पर हमला, आगजनी और तोड़फोड़
प्रदर्शनकारियों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है। भीड़ ने राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल के निजी आवास पर धावा बोल दिया और वहां तोड़फोड़ के बाद आगजनी की। सुरक्षा बलों की तैनाती के बावजूद स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में नहीं है।
देउबा गुट के सभी मंत्रियों ने दिया इस्तीफा
शेर बहादुर देउबा की अगुवाई वाली नेपाली कांग्रेस के सभी मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफा देने वाले मंत्रियों में शामिल हैं:
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प्रकाश मान सिंह (उप प्रधानमंत्री)
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आरजू राणा देउबा (विदेश मंत्री)
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तेजु लाल चौधरी (खेल मंत्री)
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अजय चौरसिया (कानून मंत्री)
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दीपक खड़का (ऊर्जा मंत्री)
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ऐन बहादुर शाही (वानिकी मंत्री)
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प्रदीप पौडेल (स्वास्थ्य मंत्री)
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रामनाथ अधिकारी (कृषि मंत्री)
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बद्री पांडे (पर्यटन मंत्री)
इन इस्तीफों से गठबंधन की नींव हिल गई है। 88 सीटों वाली नेपाली कांग्रेस और 79 सीटों वाली CPN-UML की साझेदारी अब खतरे में है।
पूर्व प्रधानमंत्री देउबा और गृह मंत्री के घरों पर हमले
प्रदर्शनकारियों ने गृह मंत्री रमेश लेखक के घर पर हमला कर उसे आग के हवाले कर दिया। पूर्व पीएम शेर बहादुर देउबा के घर पर भी भीड़ ने हिंसक प्रदर्शन किया और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया।
जल मंत्री प्रदीप यादव ने दिया इस्तीफा, आंदोलन को बताया जायज़
ओली सरकार में जल मंत्री प्रदीप यादव ने भी अपने पद से इस्तीफा देते हुए कहा,
“मैं सरकार की दमनकारी नीति के खिलाफ और जनरेशन Z की युवा आवाज के समर्थन में इस्तीफा देता हूं।”
राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के 21 सांसदों ने सामूहिक इस्तीफा दिया
रवि लामिछाने के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के 21 सांसदों ने भी सामूहिक इस्तीफा देकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। यह पार्टी संसद में पहली बार चुनकर आई थी और अब उन्होंने खुलेआम आंदोलन का समर्थन कर दिया है।
निष्कर्ष:
नेपाल की सियासत अभूतपूर्व मोड़ पर पहुंच गई है। सरकार में शामिल बड़े चेहरों के इस्तीफे और जनआक्रोश ने ओली सरकार को संकट में डाल दिया है। ऐसे में सवाल उठता है—क्या ओली सरकार अब भी सत्ता में बनी रह पाएगी या नेपाल एक बार फिर राजनीतिक अस्थिरता की ओर बढ़ रहा है?
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