भारत का कड़ा संदेश: पाकिस्तान और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमले तुरंत रोके जाएं
नई दिल्ली/जिनेवा, 8 अगस्त –
भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदुओं सहित धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हो रही हिंसा का मुद्दा मजबूती से उठाया है। विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने संसद में जानकारी दी कि भारत ने दोनों पड़ोसी देशों के सामने बीते वर्षों में दर्ज हुईं कुल 3,916 घटनाओं (334 पाकिस्तान में और 3,582 बांग्लादेश में) को गंभीरता से उठाया है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत की दो टूक
भारत ने जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में कहा कि पाकिस्तान और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा न केवल चिंता का विषय है, बल्कि यह उनके संवैधानिक अधिकारों का भी सीधा उल्लंघन है।
यूएन विशेषज्ञों ने भी पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि वह अहमदिया समुदाय समेत अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों, पूजा स्थलों की तोड़फोड़ और न्यायेतर हत्याओं पर तत्काल रोक लगाए। उन्होंने कहा, “यह हिंसा अब एक संगठित और अनियंत्रित रूप ले चुकी है, जिसमें कई बार सरकार की चुप्पी संदेह पैदा करती है।”
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‘दंड से मुक्ति का चक्र’ तोड़ने की मांग
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने कहा कि पाकिस्तान में ऐसे हमले सरकारी मौन समर्थन के चलते और भी बढ़ गए हैं। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान सरकार को दंड से मुक्ति के इस पैटर्न को तोड़ना होगा, जिससे नफरत फैलाने वाले तत्व कानून से बचते रहते हैं।”
भारत ने रखी साफ मांग
विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने कहा कि भारत ने उच्चतम स्तर पर बांग्लादेश सरकार से यह अपेक्षा जताई है कि वह हिंदुओं और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए। उन्होंने संसद में बताया कि भारत इस प्रकार की घटनाओं पर नियमित निगरानी रख रहा है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी यह मुद्दा उठाया गया है।
धार्मिक असहिष्णुता को लेकर चिंता
भारत सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि धार्मिक आस्था के आधार पर हो रही हिंसा को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश में वर्ष 2021 से अब तक 3,582 घटनाएं और पाकिस्तान में 334 घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया गया है।
भारत का पड़ोसियों को संदेश
भारत ने साफ तौर पर कहा है कि आस्था के आधार पर किसी समुदाय के खिलाफ घृणा और हमले अस्वीकार्य हैं, और इन पर तत्काल रोक लगनी चाहिए। भारत की यह पहल न केवल क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकारों की रक्षा के लिए भी एक मजबूत उदाहरण है।
