बिहार में बोले अमित शाह — घुसपैठियों को नहीं मिलेगा वोट का अधिकार, SIR का जिक्र कर राहुल-तेजस्वी पर साधा निशाना
सीतामढ़ी, 8 अगस्त —
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को बिहार के सीतामढ़ी जिले के पुनौरा धाम में माता सीता को समर्पित भव्य जानकी मंदिर के निर्माण के लिए भूमिपूजन किया। इस धार्मिक आयोजन के साथ-साथ उन्होंने राजनीति की भी बड़ी जमीन तैयार की और आगामी बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर विपक्ष पर तीखे हमले किए।
इस मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी मौजूद रहे। शाह ने सीतामढ़ी-दिल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके बाद जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने राहुल गांधी, तेजस्वी यादव और लालू प्रसाद यादव को आड़े हाथों लिया।
क्या है SIR विवाद?
अमित शाह ने अपने भाषण में SIR (Special Intensive Revision) का कई बार जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह वोटर लिस्ट की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया है, जो समय-समय पर होती रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष इस प्रक्रिया का विरोध इसलिए कर रहा है क्योंकि घुसपैठिए उनका वोट बैंक हैं।
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“घुसपैठियों को कभी नहीं मिलेगा वोट का अधिकार”
शाह ने कहा, “मैं बिहार की जनता से पूछना चाहता हूं — क्या घुसपैठियों को मतदाता सूची से नहीं हटाना चाहिए? क्या चुनाव आयोग को SIR नहीं करना चाहिए?” उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत के संविधान के अनुसार, केवल भारतीय नागरिकों को ही मतदान का अधिकार है।
राहुल गांधी पर तीखा हमला
शाह ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को वोट बैंक की राजनीति का प्रतीक बताते हुए कहा, “राहुल गांधी को संविधान पढ़ना चाहिए। वो SIR का विरोध इसलिए कर रहे हैं क्योंकि बिहार चुनाव में हार निश्चित है।” उन्होंने कहा कि यह कोई नई प्रक्रिया नहीं है। “इसकी शुरुआत जवाहरलाल नेहरू के समय में हुई थी और 2003 में भी इसे लागू किया गया था।”
लालू-तेजस्वी पर सवाल
अपने संबोधन में शाह ने कहा, “लालू यादव किन्हें बचाना चाहते हैं? क्या उन बांग्लादेशियों को जो बिहार आकर नौकरियां छीनते हैं?” उन्होंने तेजस्वी यादव से सवाल किया कि उनके माता-पिता लंबे समय तक सत्ता में रहे, लेकिन मिथिलांचल के विकास के लिए क्या किया? उन्होंने आरोप लगाया कि गुंडागर्दी, फिरौती और गिरोह चलाना ही उनका काम रहा है।
जनता से किया स्पष्ट आह्वान
शाह ने मंच से कहा, “बिहार में अब बदलाव की जरूरत है। एनडीए सरकार बहुमत से फिर सत्ता में लौटेगी और किसी भी घुसपैठिए को न तो अधिकार मिलेगा और न ही वोट।”
निष्कर्ष:
अमित शाह के इस दौरे ने बिहार में 2025 के विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश को और तेज कर दिया है। जहां एक ओर मंदिर के भूमिपूजन और विकास कार्यों की घोषणा की गई, वहीं दूसरी ओर विपक्ष पर सीधा राजनीतिक हमला करते हुए घुसपैठ, वोट बैंक और सुरक्षा जैसे मुद्दों को लेकर माहौल तैयार करने की कोशिश की गई।
