राजस्थान शिक्षा विभाग की हाल ही में जारी स्थानांतरण सूची ने एक गंभीर प्रशासनिक चूक को उजागर कर दिया है। वर्षों तक गृह क्षेत्र के पास तबादले की प्रतीक्षा करने वाले एक शिक्षक का स्थानांतरण उनके निधन के बाद कर दिया गया। सूची में मृतक शिक्षक का नाम शामिल होने के बाद विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, उदरासर स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में पिछले 18 वर्षों से कार्यरत शिक्षक गणेश प्रकाश जोहिया लगातार अपने गृह क्षेत्र के निकट स्थानांतरण की मांग कर रहे थे। उन्होंने कई बार विभाग और जनप्रतिनिधियों को प्रार्थना-पत्र देकर अपनी इच्छा जताई, लेकिन उनकी मांग पर कोई निर्णय नहीं लिया गया।
30 जून 2026 को गणेश प्रकाश जोहिया ने उदरासर के उपस्वास्थ्य केंद्र परिसर स्थित अपने आवास में आत्महत्या कर ली थी। उनके निधन से परिवार, सहकर्मियों और ग्रामीणों में शोक की लहर दौड़ गई थी।
इसके बाद शिक्षा विभाग द्वारा जारी तबादला सूची में उनका स्थानांतरण राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, देवीकुंड सागर कर दिया गया। सूची सामने आने के बाद लोगों ने सवाल उठाए कि जिस शिक्षक को जीवित रहते वर्षों तक मनचाही पोस्टिंग नहीं मिल सकी, उसका तबादला मृत्यु के बाद कैसे जारी हो गया।
- Advertisement -
ग्रामीणों, परिजनों और सहकर्मियों का कहना है कि यदि समय रहते उनकी मांग पर निर्णय लिया गया होता तो शायद परिस्थितियां अलग हो सकती थीं। वहीं प्रशासनिक मामलों के जानकारों का मानना है कि स्थानांतरण आदेश जारी करने से पहले कर्मचारियों के सेवा अभिलेखों का अद्यतन सत्यापन किया जाना चाहिए था। उनका कहना है कि यह मामला प्रशासनिक प्रक्रिया में लापरवाही और संवेदनशीलता की कमी दोनों को सामने लाता है। इस घटना के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
