राजस्थान के निजी विद्यालय अब शिक्षा विभाग की डिजिटल निगरानी व्यवस्था के तहत आएंगे। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने राज शाला संबलन मोबाइल ऐप के माध्यम से निजी स्कूलों के नियमित निरीक्षण और ऑनलाइन मॉनिटरिंग की नई व्यवस्था लागू कर दी है।
नई व्यवस्था के तहत संभाग, जिला और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों को हर महीने निर्धारित लक्ष्य के अनुसार निजी विद्यालयों का निरीक्षण करना होगा। निरीक्षण के बाद पूरी रिपोर्ट ऐप पर ऑनलाइन अपलोड करनी अनिवार्य होगी। विभाग का उद्देश्य निजी स्कूलों में राजस्थान विद्यालय (फीस का विनियमन) अधिनियम-2016, नियम-2017, आरटीई अधिनियम, स्कूल बस संचालन नियमों और विद्यार्थियों को पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराने से जुड़े निर्देशों की प्रभावी पालना सुनिश्चित करना है।
निरीक्षण के दौरान अधिकारी यह जांच करेंगे कि स्कूलों में फीस नियमों का पालन हो रहा है या नहीं। आरटीई के तहत प्रवेशित विद्यार्थियों से किसी प्रकार की अतिरिक्त वसूली तो नहीं की जा रही, अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से किताबें, यूनिफॉर्म या जूते खरीदने के लिए मजबूर तो नहीं किया जा रहा। इसके अलावा हर साल अनावश्यक रूप से पाठ्य पुस्तकों में बदलाव, पीटीए और फीस समिति के गठन की स्थिति की भी जांच होगी।
स्कूल बसों की फिटनेस, परिवहन नियमों की पालना, अग्नि सुरक्षा प्रमाण-पत्र, भवन सुरक्षा, बाल सुरक्षा व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल, शौचालय, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात, दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए सुविधाएं और विद्यालय मान्यता से जुड़े दस्तावेज भी निरीक्षण के दायरे में रहेंगे।
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शिक्षा विभाग ने अधिकारियों के लिए मासिक निरीक्षण लक्ष्य भी तय किए हैं। प्रत्येक अधिकारी को आवंटित निजी विद्यालयों में से कम से कम 75 प्रतिशत स्कूलों का निरीक्षण करना अनिवार्य होगा। लक्ष्य पूरा नहीं करने पर संबंधित अधिकारी के अंक शून्य माने जाएंगे। प्रत्येक निरीक्षित विद्यालय के लिए एक अंक निर्धारित किया गया है।
निरीक्षण अभियान की प्रगति की समीक्षा के लिए संभाग, जिला और ब्लॉक स्तर पर हर 15 दिन में वर्चुअल बैठक आयोजित की जाएगी। राज्य स्तर पर भी अभियान की नियमित समीक्षा की जाएगी। अधिकारियों को ओटीपी आधारित लॉगिन के माध्यम से ऐप पर निरीक्षण रिपोर्ट दर्ज करनी होगी।
