बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में प्रसूताओं के किडनी फेल होने के मामलों के बाद अस्पताल प्रशासन ने प्रसूति सेवाओं में सुधार की प्रक्रिया शुरू कर दी है। लेबर रूम, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग तथा एमसीएच बिल्डिंग की व्यवस्थाओं की समीक्षा के लिए आठ सदस्यीय समिति का गठन किया गया है।
यह समिति अस्पताल की उपचार व्यवस्था, मरीज सुविधाओं, रिकॉर्ड संधारण, चिकित्सकीय समन्वय और अन्य व्यवस्थाओं का विस्तृत ऑडिट करेगी। समीक्षा के बाद समिति सुधार के लिए आवश्यक सुझाव देगी, जिनके आधार पर अस्पताल प्रशासन आगे की कार्ययोजना तैयार करेगा।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार समिति विशेष रूप से लेबर रूम और प्रसूति विभाग की कार्यप्रणाली का मूल्यांकन करेगी। इसमें मरीजों को उपलब्ध सुविधाएं, उपचार प्रक्रिया, संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था, चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ के बीच तालमेल, निगरानी प्रणाली तथा मरीजों एवं परिजनों से मिलने वाले फीडबैक को भी शामिल किया जाएगा।
गौरतलब है कि पिछले माह जोधपुर एम्स की विशेषज्ञ टीम और चिकित्सा शिक्षा विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने पीबीएम अस्पताल का निरीक्षण किया था। इस दौरान व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश दिए गए थे। इन्हीं निर्देशों की पालना के तहत अब यह समिति गठित की गई है।
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प्रसूता मरीजों के किडनी फेल होने के मामलों के बाद अस्पताल की उपचार व्यवस्था, मरीज सुरक्षा और प्रशासनिक निगरानी को लेकर कई सवाल उठे थे। इसके बाद लेबर रूम, ऑपरेशन थिएटर और प्रसूति विभाग की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है।
समिति में डॉ. अभिषेक क्वात्रा, डॉ. स्वाति कोचर, डॉ. सुमन बुढ़ानिया, डॉ. कमलेश यादव, डॉ. मोनिका सोनी के साथ एक सिविल इंजीनियर और एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर को शामिल किया गया है।
पीबीएम अस्पताल अधीक्षक डॉ. बी.सी. घीया ने बताया कि समिति की रिपोर्ट के आधार पर उपचार व्यवस्था में पारदर्शिता, समयबद्ध सेवाएं और बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के लिए जरूरी सुधार लागू किए जाएंगे। अस्पताल का उद्देश्य मरीजों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।
