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बीकानेर

बीकानेर से मिली नई छिपकली प्रजाति ने वैज्ञानिकों को चौंकाया

editor
editor Published June 3, 2026
Last updated: 2026/06/03 at 3:42 PM
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बीकानेर। राजस्थान के बीकानेर जिले में वैज्ञानिकों ने छिपकली की एक नई प्रजाति की खोज कर जैव विविधता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। ‘मेसालिना बिश्नोई’ नामक यह प्रजाति भारत में मेसालिना वंश का पहला पुष्ट रिकॉर्ड मानी जा रही है। इसकी पहचान गजनेर क्षेत्र में किए गए एक वैज्ञानिक सर्वेक्षण के दौरान हुई।

भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (जेडएसआई) और अन्य शोधकर्ताओं की टीम ने अगस्त 2025 में गजनेर के निकट अर्ध-मरुस्थलीय इलाके में इस दुर्लभ छिपकली का नमूना एकत्र किया था। बाद में इसके आकारिकी और आनुवंशिक परीक्षणों से पुष्टि हुई कि यह विज्ञान के लिए पूरी तरह नई प्रजाति है।

शोधकर्ताओं के अनुसार मेसालिना वंश की छिपकलियां आमतौर पर शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में पाई जाती हैं तथा तेज गति से चलने और दिन में सक्रिय रहने के लिए जानी जाती हैं। हालांकि इस वंश का उल्लेख पहले भी ऐतिहासिक साहित्य में मिलता है, लेकिन भारत में इसकी मौजूदगी का कोई प्रमाणित रिकॉर्ड अब तक उपलब्ध नहीं था।

नई प्रजाति का नाम ‘मेसालिना बिश्नोई’ बिश्नोई समुदाय के प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण में योगदान को सम्मान देने के लिए रखा गया है। अध्ययन के सह-लेखक धर्मेंद्र खंडाल ने बताया कि यह नाम समुदाय की पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को समर्पित है।

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यह छिपकली आकार में छोटी है और इसका शरीर भूरे रंग का होता है। शरीर पर गहरे धब्बे, सफेद निशान और आंखों के पीछे काले चिह्न इसकी विशेष पहचान हैं। आनुवंशिक विश्लेषण में यह अपने निकट संबंधी जीवों से स्पष्ट रूप से अलग पाई गई, जिससे इसे अलग प्रजाति के रूप में मान्यता मिली।

फिलहाल यह प्रजाति केवल बीकानेर जिले के गजनेर क्षेत्र में ही दर्ज की गई है। वैज्ञानिकों का मानना है कि थार मरुस्थल और पश्चिमी भारत के शुष्क क्षेत्रों में अभी भी कई अज्ञात सरीसृप प्रजातियां मौजूद हो सकती हैं, जिनकी खोज भविष्य में की जा सकती है।


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editor June 3, 2026
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