आज ज्येष्ठ अमावस्या के अवसर पर शनि जयंती श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन सूर्यपुत्र शनि देव का जन्म हुआ था। इस बार शनि जयंती शनिवार के दिन पड़ने से इसका महत्व और अधिक बढ़ गया है। शनि देव को कर्मफल दाता और न्याय का देवता माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि आज विधि-विधान से पूजा और उपाय करने से शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव कम होते हैं।
आज अमावस्या तिथि शाम 5:40 बजे तक रहेगी। पूजा के लिए सुबह 9:15 से 10:45 बजे तक अमृत काल और शाम 6:30 से 8:30 बजे तक संध्या काल विशेष शुभ माना गया है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार सूर्यास्त के बाद शनि पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है।
शनि जयंती पर पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना, सात परिक्रमा करना और छाया दान करना बेहद शुभ माना गया है। साथ ही हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करने से शनि देव की कृपा प्राप्त होती है। मान्यता है कि शनि देव हनुमान भक्तों को कष्ट नहीं देते।
आज के दिन काले तिल, काली उड़द, लोहे के बर्तन, काले वस्त्र और जरूरतमंदों को भोजन दान करने का विशेष महत्व बताया गया है। कुंभ, मकर, मीन, कर्क और वृश्चिक राशि के जातकों के लिए यह दिन खास माना जा रहा है। इन राशियों के लोगों को शनि मंत्र जाप और सुंदरकांड पाठ करने की सलाह दी गई है।
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शनि दोष से राहत पाने के लिए “ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करना शुभ माना गया है। इसके अलावा शनि मंदिर में तैल अभिषेक और विधिपूर्वक पूजा करने से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होने की मान्यता है।
