बीकानेर में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा संचालित “सुखद दाम्पत्य जीवन योजना” के तहत दिव्यांग युवक-युवतियों को विवाह के बाद आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। योजना का उद्देश्य दिव्यांगजनों को वैवाहिक जीवन में आर्थिक संबल उपलब्ध करवाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के संयुक्त निदेशक एल.डी. पंवार ने बताया कि योजना के तहत 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाले पात्र दंपत्तियों को एकमुश्त 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। वहीं 80 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता श्रेणी वाले दिव्यांगजनों को 5 लाख रुपये तक की सहायता राशि उपलब्ध करवाई जाएगी।
उन्होंने बताया कि योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक का भारत सरकार के दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के तहत प्रमाणित दिव्यांग होना जरूरी है। साथ ही आवेदक की दिव्यांगता न्यूनतम 40 प्रतिशत होनी चाहिए और वह राजस्थान का मूल निवासी होना आवश्यक है।
योजना के अनुसार दिव्यांग वर की न्यूनतम आयु 21 वर्ष तथा वधू की आयु 18 वर्ष या उससे अधिक निर्धारित की गई है। इसके अतिरिक्त परिवार की वार्षिक आय सभी स्रोतों को मिलाकर 2 लाख 50 हजार रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।
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संयुक्त निदेशक एल.डी. पंवार ने बताया कि आवेदन प्रक्रिया के दौरान दिव्यांगता प्रमाण पत्र, माता-पिता का शपथ पत्र, जन्मतिथि प्रमाण पत्र, आय प्रमाण संबंधी शपथ पत्र, विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र तथा पूर्व में अनुदान प्राप्त नहीं करने का प्रमाण पत्र संलग्न करना अनिवार्य होगा।
उन्होंने कहा कि पात्र दिव्यांगजन विवाह के छह माह के भीतर ई-मित्र कियोस्क या स्वयं की एसएसओ आईडी के माध्यम से एसजेएमएस डीएसएपी पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर योजना का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। विभाग की ओर से अधिक से अधिक पात्र लोगों को योजना से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है ताकि जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक राहत मिल सके।
सरकार की यह योजना दिव्यांगजनों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। इससे दिव्यांग दंपत्तियों को वैवाहिक जीवन की शुरुआत में आर्थिक सहयोग मिलने से राहत मिलेगी।
