पश्चिमी राजस्थान के लाखों लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। करीब 45 दिनों से जारी इंदिरा गांधी नहर परियोजना की नहरबंदी अब समाप्त हो गई है। पंजाब के हरिके बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद आने वाले 4 से 5 दिनों में राजस्थान तक नहरी पानी पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। इसके साथ ही बीकानेर, फलोदी, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बाड़मेर और जैसलमेर सहित कई जिलों में 14 से 15 मई तक पेयजल और सिंचाई जलापूर्ति फिर से सुचारू हो सकेगी।
इंदिरा गांधी नहर पश्चिमी राजस्थान के लिए जीवनरेखा मानी जाती है। नहरबंदी के चलते पिछले डेढ़ महीने से कई इलाकों में पेयजल संकट गहराने लगा था। भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान के बीच ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की भारी किल्लत देखने को मिली। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार करीब 851 गांवों में पेयजल संकट की स्थिति बनी रही।
नहरबंदी के दौरान जलदाय विभाग ने कई क्षेत्रों में पेयजल भंडारण की व्यवस्था कर स्थिति को संभालने का प्रयास किया। विभाग ने शहरों और कस्बों में पहले से टंकियों और जलाशयों को भरने की तैयारी की थी ताकि लोगों को ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। हालांकि ग्रामीण इलाकों में कई जगह लापरवाही भी सामने आई। कई गांवों की पेयजल डिग्गियां समय पर नहीं भरी जा सकीं, जिसके कारण लोगों को टैंकरों और वैकल्पिक जल स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ा।
अब हरिके बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद नहर में जल प्रवाह शुरू हो गया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अगले कुछ दिनों में नहर का पानी राजस्थान की सीमा तक पहुंच जाएगा और उसके बाद विभिन्न जिलों में नियमित सप्लाई बहाल कर दी जाएगी। इससे पेयजल संकट के साथ-साथ किसानों को भी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि खरीफ सीजन से पहले सिंचाई पानी की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिमी राजस्थान में बढ़ती गर्मी और जल संकट को देखते हुए नहर परियोजना की नियमित मॉनिटरिंग और ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर जल प्रबंधन की आवश्यकता है। इस बार नहरबंदी के दौरान कई क्षेत्रों में सामने आई समस्याओं ने स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों की तैयारियों पर भी सवाल खड़े किए हैं।
फिलहाल नहरबंदी खत्म होने से आमजन ने राहत की सांस ली है और आने वाले दिनों में जलापूर्ति सामान्य होने की उम्मीद बढ़ गई है।
