राजस्थान में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत करोड़ों रुपए के कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर हड़कंप मच गया है। हनुमानगढ़ जिले में करीब 9 करोड़ रुपए के बीमा क्लेम जारी करने की तैयारी थी, लेकिन कृषि मंत्री Kirodi Lal Meena के हस्तक्षेप के बाद पूरे मामले पर रोक लगा दी गई।
जानकारी के अनुसार मामले की गंभीरता को देखते हुए कृषि मंत्री गुरुवार को हनुमानगढ़ जिले के पल्लू स्थित स्टेट बैंक शाखा पहुंचे। यहां उन्होंने शाखा प्रबंधक अंकुश मिगलानी से उन 162 किसानों की गिरदावरी संबंधी दस्तावेज मांगे, जिनके नाम पर फसल बीमा किया गया था। हालांकि शाखा प्रबंधक बैंक में संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की बात कहते नजर आए।
मंत्री ने जब बीमा प्रक्रिया और दस्तावेजों को लेकर सवाल पूछे तो बैंक प्रबंधन संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। इस दौरान कृषि मंत्री ने नाराजगी जताते हुए मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारी से भी मामले की जानकारी लेने को कहा। उन्होंने सवाल उठाया कि बिना गिरदावरी और आवश्यक दस्तावेजों के किसानों का फसल बीमा कैसे किया गया।
कृषि मंत्री ने कहा कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बिना कृषि भूमि की जमाबंदी और आवश्यक सत्यापन के बीमा पॉलिसियां जारी कर दी गई थीं। इतना ही नहीं, करोड़ों रुपए के क्लेम की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही थी। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते मामला पकड़ में नहीं आता तो सरकारी योजना के नाम पर बड़ा आर्थिक घोटाला हो सकता था।
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मामला उजागर होने के बाद जांच के दायरे में आए किसानों के खातों को फ्रीज करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। साथ ही संबंधित अधिकारियों और बैंक कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
सरकार की ओर से पूरे मामले की विस्तृत जांच के संकेत दिए गए हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
