मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान-इजरायल संघर्ष के गंभीर रूप लेने के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेजी से कूटनीतिक पहल शुरू कर दी है। क्षेत्र में बसे लाखों भारतीयों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रधानमंत्री ने पिछले 48 घंटों में कई अहम देशों के शीर्ष नेताओं से बातचीत की है। भारत ने साफ किया है कि मौजूदा हालात पर वह लगातार नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर हर जरूरी कदम उठाएगा।
आठ देशों के नेताओं से सीधा संवाद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में
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इजरायल
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संयुक्त अरब अमीरात
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सऊदी अरब
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जॉर्डन
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बहरीन
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ओमान
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कुवैत
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कतर
के नेताओं से अलग-अलग बातचीत की। इन वार्ताओं का मुख्य उद्देश्य संबंधित देशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, निकासी योजनाओं की तैयारी और आपातकालीन सहयोग तंत्र को मजबूत करना रहा।
ओमान और कुवैत से विशेष चर्चा
प्रधानमंत्री ने ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक और कुवैत के क्राउन प्रिंस शेख सबा अल-खालिद अल-हमद अल-मुबारक अल-सबाह से फोन पर विस्तार से बात की। बातचीत के दौरान क्षेत्र में हो रहे हमलों पर चिंता व्यक्त की गई और वहां बसे भारतीय समुदाय की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारतीय दूतावासों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और स्थानीय प्रशासन के साथ निरंतर समन्वय किया जा रहा है।
विदेश मंत्रालय की स्पष्ट अपील
विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि भारत ने पहले भी सभी पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान निकालने की अपील की थी। मंत्रालय ने यह भी रेखांकित किया कि रमजान के दौरान हिंसा का बढ़ना बेहद चिंताजनक है।
भारत ने दोहराया कि किसी भी प्रकार का सैन्य विस्तार न केवल क्षेत्रीय स्थिरता बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी खतरनाक साबित हो सकता है।
एक करोड़ भारतीयों पर नजर
गल्फ और खाड़ी क्षेत्र में लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं। ये लोग निर्माण, स्वास्थ्य, ऊर्जा, सेवा और व्यापार क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारतीयों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा। जरूरत पड़ने पर विशेष उड़ानों या अन्य वैकल्पिक व्यवस्थाओं की तैयारी भी की जा सकती है।
अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर असर
मिडिल ईस्ट भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख स्रोत है। कच्चे तेल और गैस का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है। यदि समुद्री मार्ग या सप्लाई चेन बाधित होती है तो इसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
हाल के दिनों में मर्चेंट शिपिंग पर हमलों की घटनाओं ने भी चिंता बढ़ाई है। भारत ने ऐसे हमलों की कड़ी निंदा की है, क्योंकि इससे वैश्विक व्यापार और भारतीय नागरिकों की जान दोनों पर खतरा मंडरा रहा है।
कूटनीति पर भारत का भरोसा
भारत ने स्पष्ट किया है कि वह युद्ध की बजाय संवाद और कूटनीति के रास्ते का समर्थन करता है। प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री लगातार अपने समकक्षों से संपर्क में हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सक्रिय कूटनीति से भारत न केवल अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहता है, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में भी रचनात्मक भूमिका निभाना चाहता है।
