मिडिल ईस्ट में छिड़ी सीधी सैन्य टकराहट ने दुनिया को एक बार फिर महायुद्ध की आशंका में धकेल दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के बीच रक्षा खर्च के जो आंकड़े सामने आए हैं, उन्होंने वैश्विक समुदाय को चौंका दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने सैन्य अभियान के पहले 24 घंटों में ही करीब 779 मिलियन डॉलर यानी लगभग 6,500 करोड़ रुपये हथियारों और ऑपरेशनों पर खर्च कर दिए।
यह रकम आधुनिक युद्ध की भयावह लागत को दर्शाती है, जहां हर मिसाइल और हर उड़ान करोड़ों डॉलर में तौली जाती है।
किस नाम से चल रहा है अभियान
अमेरिकी रक्षा विभाग Pentagon ने इस सैन्य कार्रवाई को “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” नाम दिया है। इस अभियान के तहत ईरान की सामरिक क्षमता, मिसाइल ठिकानों और नौसैनिक ताकत को निशाना बनाया जा रहा है।
अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि यह कार्रवाई ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को निष्क्रिय करने के उद्देश्य से की जा रही है।
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महंगे हथियारों की बरसात
इस ऑपरेशन में अमेरिका ने अपने सबसे अत्याधुनिक लड़ाकू संसाधनों को झोंक दिया। इनमें शामिल हैं:
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B-2 Spirit स्टील्थ बॉम्बर
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F-22 Raptor
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F-35 Lightning II
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F-16 Fighting Falcon
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Tomahawk क्रूज मिसाइल
जानकारी के अनुसार, केवल बी-2 स्टील्थ बॉम्बर के एक दिन के ऑपरेशन पर 30 मिलियन डॉलर से अधिक खर्च हुआ। वहीं अमेरिकी नौसेना ने समुद्र से लगभग 200 टॉमहॉक मिसाइलें दागीं, जिनकी लागत 340 मिलियन डॉलर से अधिक बताई जा रही है।
एयरक्राफ्ट कैरियर संचालन, ईंधन, लॉजिस्टिक्स और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम का खर्च अलग से जुड़ता है।
ईरान का पलटवार
ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई में कोई कसर नहीं छोड़ी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।
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कुवैत
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संयुक्त अरब अमीरात
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बहरीन
में मौजूद अमेरिकी बेस पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन हमलों की खबरें सामने आई हैं।
इस तनाव के चलते Strait of Hormuz के बंद होने की आशंका बढ़ गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया।
रक्षा बजट पर कितना असर
विश्लेषकों का कहना है कि 24 घंटे में हुआ यह खर्च अमेरिका के 2026 रक्षा बजट का लगभग 0.1 प्रतिशत है। हालांकि, अगर युद्ध लंबा खिंचता है तो अरबों डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
अमेरिका के भीतर भी एक वर्ग सवाल उठा रहा है कि टैक्सपेयर्स का पैसा विदेशों में युद्ध पर खर्च करने के बजाय घरेलू विकास और स्वास्थ्य सेवाओं पर क्यों नहीं लगाया जा रहा।
मानवीय संकट गहराया
युद्ध का सबसे दुखद पहलू आम नागरिकों पर पड़ने वाला असर है। ईरानी शहरों में बमबारी से भारी जनहानि की खबरें हैं। रिहायशी इलाकों को नुकसान पहुंचा है और बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं।
दूसरी ओर, वैश्विक सप्लाई चेन बाधित होने से व्यापार और ऊर्जा बाजार अस्थिर हो गए हैं। यह संघर्ष केवल सैन्य ताकत की लड़ाई नहीं, बल्कि आर्थिक और कूटनीतिक टकराव का भी प्रतीक बन चुका है।
आगे क्या
पेंटागन ने संकेत दिया है कि जब तक ईरान की नौसैनिक और मिसाइल क्षमता को निर्णायक रूप से कमजोर नहीं कर दिया जाता, अभियान जारी रहेगा। वहीं ईरान ने भी संघर्ष जारी रखने के संकेत दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द कूटनीतिक पहल नहीं हुई तो यह टकराव व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
