बीकानेर में हृदय रोग उपचार के क्षेत्र में आयुष्मान हार्ट केयर सेंटर लगातार आधुनिक तकनीकों के माध्यम से गंभीर मरीजों का सफल उपचार कर रहा है। सेंटर के वरिष्ठ इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. बी.एल. स्वामी ने जटिल हृदय रोगों के उपचार में अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए हजारों मरीजों को नई जिंदगी देने का दावा किया है। साथ ही कई मरीजों को बड़ी ओपन हार्ट सर्जरी से भी बचाया गया है।
कोरोना काल के दौरान शुरू हुए इस सेंटर ने कम समय में गंभीर हृदय रोगों के इलाज के लिए अपनी पहचान बनाई। वर्तमान में बीकानेर के अलावा श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, हिसार, सिरसा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार सहित विभिन्न राज्यों से मरीज यहां उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। सेंटर में विदेश से आए कुछ पर्यटकों का भी आपातकालीन हार्ट अटैक उपचार और एंजियोप्लास्टी किए जाने की जानकारी दी गई।
जटिल एंजियोप्लास्टी (CHIP) से मिला नया विकल्प
डॉ. बी.एल. स्वामी ने बताया कि CHIP (Complex and High-Risk Intervention Procedures) तकनीक के माध्यम से उन मरीजों का भी सफल इलाज किया जा रहा है, जिनकी धमनियों में गंभीर और जटिल ब्लॉकेज होते हैं। इस प्रक्रिया से कई मरीजों को बायपास सर्जरी की आवश्यकता से बचाया जा सकता है।
इस तकनीक के तहत रोटाब्लेशन (Rotablation), ऑर्बिटल एथरेक्टमी, इंट्रावास्कुलर अल्ट्रासाउंड (IVUS), OCT इमेजिंग तथा मल्टीपल स्टेंटिंग जैसी आधुनिक प्रक्रियाओं का उपयोग किया जाता है, जिससे धमनियों में रक्त प्रवाह सामान्य किया जा सके।
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कमजोर हृदय वाले मरीजों का भी सफल उपचार
डॉ. स्वामी के अनुसार, अत्यंत कम इजेक्शन फ्रैक्शन (EF) यानी 10 से 15 प्रतिशत पंपिंग क्षमता वाले मरीजों में CRT (Cardiac Resynchronization Therapy) और ICD (Implantable Cardioverter Defibrillator) जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर हृदय की कार्यक्षमता बढ़ाने का प्रयास किया गया है।
इसके अलावा गंभीर उच्च रक्तचाप से पीड़ित मरीजों के लिए Renal Denervation तकनीक तथा दिल की धीमी धड़कन वाले मरीजों में Leadless Pacemaker प्रत्यारोपित करने जैसी उन्नत प्रक्रियाएं भी की जा रही हैं।
बिना स्टेंट के भी की जा रही एंजियोप्लास्टी
सेंटर में चयनित मरीजों के लिए Drug-Eluting Balloon Angioplasty जैसी तकनीक का उपयोग कर बिना स्टेंट के भी उपचार किया जा रहा है। वहीं जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों के दिल में छेद बंद करने के लिए विशेष डिवाइस (छतरी तकनीक) का भी सफल उपयोग किया गया है।
एंजियोप्लास्टी के बाद जीवनशैली में बदलाव जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि एंजियोप्लास्टी के बाद मरीजों को नियमित दवाइयों का सेवन, संतुलित एवं हृदय-हितैषी आहार, धूम्रपान और शराब से परहेज तथा समय-समय पर चिकित्सकीय जांच कराना आवश्यक है, ताकि भविष्य में दोबारा ब्लॉकेज की संभावना कम हो सके।
डॉ. बी.एल. स्वामी को आधुनिक इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी के क्षेत्र में युवा चिकित्सकों के लिए प्रेरणास्रोत माना जाता है। वे नई चिकित्सा तकनीकों और दवाओं के उपयोग को लेकर चिकित्सकों को लगातार मार्गदर्शन भी प्रदान कर रहे हैं।
