राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत के प्रस्तावित बेलगावी दौरे से पहले कर्नाटक प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था लागू कर दी है। कार्यक्रमों के शांतिपूर्ण आयोजन और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने कार्यक्रम स्थलों के आसपास विशेष प्रतिबंध लागू किए हैं। इसके साथ ही अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर निगरानी भी बढ़ा दी गई है।
जिला प्रशासन की ओर से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 163 के तहत आदेश जारी करते हुए 6 जुलाई से 14 जुलाई तक तीन कार्यक्रम स्थलों के आसपास दो किलोमीटर के दायरे को ‘नो फ्लाई जोन’ घोषित किया गया है। इस अवधि में ड्रोन, यूएवी (UAV), यूएएस (UAS) और पैराग्लाइडर जैसे हवाई उपकरणों के संचालन पर पूरी तरह रोक रहेगी।
प्रशासन के अनुसार यह प्रतिबंध उन सभी स्थानों पर लागू रहेगा, जहां आरएसएस के कार्यक्रम और बैठकें आयोजित की जानी हैं। सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि प्रतिबंधों का सख्ती से पालन कराया जाए और किसी भी तरह की सुरक्षा चूक न होने दी जाए।
दौरे के दौरान शहर में पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है। प्रमुख मार्गों पर वाहन जांच की जा रही है, जबकि कार्यक्रम स्थलों और आसपास के क्षेत्रों में सीसीटीवी और सुरक्षा निगरानी को भी मजबूत किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि आम नागरिकों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
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इस बीच, कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे की ओर से सुरक्षा व्यवस्था पर कोई नई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि आरएसएस को लेकर उनके पूर्व बयानों के कारण यह दौरा राजनीतिक चर्चाओं में बना हुआ है।
गौरतलब है कि प्रियांक खरगे ने आरएसएस के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर मोहन भागवत को एक खुला पत्र लिखकर संगठन की कानूनी स्थिति, वित्तीय पारदर्शिता और संवैधानिक पहलुओं से जुड़े कई सवाल उठाए थे। इस पत्र के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया था और भाजपा ने कांग्रेस पर आरएसएस को निशाना बनाने का आरोप लगाया था।
बाद में आरएसएस के खिलाफ कथित मानहानिकारक टिप्पणियों से जुड़े एक मामले में बेंगलुरु की अदालत ने प्रियांक खरगे और मोहम्मद हारिस नलापड़ को समन भी जारी किया। इस घटनाक्रम के बीच बेलगावी में होने वाले आरएसएस के कार्यक्रमों को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं।
