राजस्थान के शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार सभी स्कूलों को बंद नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि केवल उन विद्यालयों की समीक्षा की जा रही है, जहां विद्यार्थियों का नामांकन बेहद कम है। ऐसे स्कूलों के संबंध में ही आवश्यक निर्णय लिया जाएगा।
कोटा के सियाम ऑडिटोरियम में आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में मंत्री दिलावर ने कहा कि अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों को बंद किए जाने की खबरें भ्रामक हैं। सरकार का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाना है, न कि बिना कारण विद्यालयों को बंद करना। उन्होंने कहा कि जिन संस्थानों में पर्याप्त संख्या में विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं, वे पहले की तरह संचालित होते रहेंगे।
उन्होंने बताया कि शिक्षा विभाग ने कम नामांकन वाले विद्यालयों का आंकलन शुरू किया है। संबंधित जिलों से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी गई है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। सरकार प्रत्येक निर्णय विद्यार्थियों के हित और शिक्षा की गुणवत्ता को ध्यान में रखकर ही करेगी।
मदन दिलावर ने पचपदरा रिफाइनरी परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह राजस्थान के औद्योगिक विकास में अहम भूमिका निभाएगी। उनके अनुसार इस परियोजना से लगभग 35 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और करीब एक लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलने की संभावना है। इससे आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।
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उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार शेखावाटी क्षेत्र तक यमुना नदी का पानी पहुंचाने की योजना पर कार्य कर रही है। इस परियोजना के पूरा होने पर चूरू, झुंझुनूं, सीकर सहित कई जिलों के लोगों को पेयजल और सिंचाई की बेहतर सुविधा मिल सकेगी।
शिक्षा मंत्री ने प्रदेश के जर्जर विद्यालय भवनों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जहां भी जरूरत होगी, वहां मरम्मत और सुधार कार्य कराए जाएंगे ताकि विद्यार्थियों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।
गौरतलब है कि हाल ही में राज्य सरकार ने कम नामांकन वाले करीब 300 महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों की समीक्षा शुरू की थी। इसके बाद स्कूलों के बंद होने की चर्चाएं तेज हो गई थीं। अब शिक्षा मंत्री ने साफ कर दिया है कि यह प्रक्रिया केवल कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों तक सीमित है और सभी स्कूलों पर इसका प्रभाव नहीं पड़ेगा।
