राजस्थान में भ्रष्टाचार, लापरवाही और अनुशासनहीनता के मामलों पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सख्त संदेश दिया है। सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत एक राजस्थान प्रशासनिक सेवा (आरएएस) अधिकारी सहित 20 अधिकारियों और कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है, जबकि 332 अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निलंबित किया गया है।
राज्य सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताओं से जुड़े मामलों में अब तक 108 प्रकरणों में अभियोजन स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत 37 मामलों में भी कार्रवाई की गई है। वहीं 577 मामलों की जांच वर्तमान में विभिन्न स्तरों पर जारी है, जिनमें दोषियों की जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया चल रही है।
सरकार का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान केवल विभागीय कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जाएगी। प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए मामलों की लगातार निगरानी की जा रही है।
सबसे बड़ी कार्रवाई जिन अधिकारियों पर हुई है, उनमें एक आरएएस अधिकारी भी शामिल हैं। सेवा से बर्खास्त किए गए अधिकारियों में आरएएस नरसिंह, उपनिदेशक डॉ. पी.आर. खींची, सहायक आचार्य डॉ. सुनील व्यास, प्रवक्ता प्रियंका दिवाकर, कृषि अधिकारी शीना लुकोश, चिकित्सा अधिकारी डॉ. संतोष कुमार, खनिज अभियंता अनिल खिमेसरा तथा लेखा सेवा के नरेंद्र तंवर सहित विभिन्न विभागों के कई अधिकारी शामिल हैं।
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सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार और गंभीर अनियमितताओं के मामलों में सेवानिवृत्ति के बाद भी राहत नहीं दी जाएगी। इसी क्रम में 17 अधिकारियों और कर्मचारियों की आजीवन शत-प्रतिशत पेंशन रोकने का निर्णय लिया गया है। इनमें आरएएस फतेह राय सोनी, अतिरिक्त निदेशक (खान) राकेश हीरात, आरपीएस ओमप्रकाश चंदोलिया सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। कुछ मामलों में सेवानिवृत्ति लाभ और ग्रेच्युटी पर भी रोक लगाई गई है।
लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से राज्य के प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने स्पष्ट कहा है कि सरकारी सेवा का उद्देश्य जनता की सेवा करना है। फाइलों को अनावश्यक रूप से लंबित रखना, आमजन को कार्यालयों के चक्कर कटवाना, सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग करना और जवाबदेही से बचना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
सरकार ने संकेत दिए हैं कि भ्रष्टाचार और लापरवाही के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। वर्तमान में 577 मामलों की जांच चल रही है, जबकि अखिल भारतीय सेवा से जुड़े नौ अधिकारियों के मामलों की भी पड़ताल की जा रही है। सरकार का लक्ष्य प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जनहित केंद्रित बनाना है।
राजस्थान में हाल के वर्षों में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताओं के खिलाफ इतनी व्यापक कार्रवाई कम ही देखने को मिली है। सरकार इसे सुशासन और प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रही है। वहीं प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए यह स्पष्ट संदेश है कि कार्य में लापरवाही, भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता के मामलों में अब सख्त कार्रवाई से बचना संभव नहीं होगा।
