जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने बीकानेर जिला एवं सत्र न्यायालय के एक आदेश के प्रभाव और संचालन पर अंतरिम रोक लगाते हुए अधीनस्थ न्यायालय की कार्यप्रणाली पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। यह मामला “राज्यश्री कुमारी बनाम सुशीला कुमारी एवं अन्य” से संबंधित है।
याचिकाकर्ता सिद्धी कुमारी की ओर से दायर सिविल रिट याचिका में बीकानेर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा 20 मई 2026 को पारित आदेश को चुनौती दी गई थी। यह आदेश 27 अक्टूबर 2025 को दायर एक आवेदन पर पारित किया गया था, जिसमें कुछ दस्तावेज प्रस्तुत करवाने की मांग की गई थी।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष के अधिवक्ता निशांक मदान ने दलील दी कि जिला न्यायालय ने आवेदन में मांगी गई राहत से आगे बढ़कर आदेश पारित किया। उन्होंने बताया कि आवेदन केवल दस्तावेज पेश करवाने तक सीमित था, लेकिन अदालत ने पुलिस सहायता उपलब्ध करवाने के निर्देश भी जारी कर दिए।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अधीनस्थ न्यायालय ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर ऐसा अनुतोष प्रदान किया, जिसकी मांग आवेदन में की ही नहीं गई थी। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि जब आवेदन में पुलिस संरक्षण या पुलिस सहायता की कोई प्रार्थना नहीं थी, तो इस प्रकार का आदेश पारित करने का आधार क्या था।
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हाईकोर्ट ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह में जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई 2026 तय की गई है। तब तक बीकानेर जिला एवं सत्र न्यायालय के 20 मई 2026 के आदेश पर रोक प्रभावी रहेगी। यह अंतरिम आदेश न्यायाधीश अनुरूप सिंघी द्वारा पारित किया गया।
