बीकानेर में राजस्थानी मोट्यार परिषद ने मंगलवार को जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर राजस्थानी भाषा को विद्यालयों में अनिवार्य विषय के रूप में लागू करने की मांग उठाई। परिषद ने साथ ही रीट परीक्षा में राजस्थानी भाषा को शामिल करने और संविधान के अनुच्छेद 345 के तहत इसे राजस्थान की राजभाषा घोषित करने की मांग भी की।
परिषद के जिलाध्यक्ष हिमांशु टाक ने बताया कि माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा राजस्थान के सभी राजकीय और निजी विद्यालयों में राजस्थानी भाषा को अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाए जाने तथा रीट परीक्षा में इसे शामिल करने संबंधी निर्णय के बाद प्रदेशभर में खुशी का माहौल है। उन्होंने कहा कि अब राज्य सरकार को इस निर्णय को प्रभावी रूप से जल्द लागू करना चाहिए।
ज्ञापन में मांग की गई कि राजस्थानी भाषा को राजस्थान की आधिकारिक राजभाषा घोषित करने की प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाए। इसके साथ ही केंद्र सरकार के समक्ष इसे संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करवाने के लिए भी प्रभावी पहल की जाए।
परिषद के सदस्य कमल मारू ने कहा कि राजस्थानी भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि राजस्थान की संस्कृति, लोक परंपराओं और स्वाभिमान की पहचान है। उन्होंने कहा कि भाषा को शिक्षा, प्रशासन और रोजगार से जोड़ना समय की आवश्यकता है ताकि नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी रह सके।
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उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश के करोड़ों लोगों की भावनाएं राजस्थानी भाषा से जुड़ी हुई हैं और लंबे समय से इसे संवैधानिक मान्यता दिलाने की मांग की जा रही है। ऐसे में सरकार को सकारात्मक कदम उठाकर इस दिशा में ठोस कार्रवाई करनी चाहिए।
ज्ञापन सौंपने के दौरान डॉ. हरिराम बिश्नोई, पार्षद सुधा आचार्य, राजेश चौधरी, प्रशांत जैन, मुकेश सिंढ़ायच, राजूनाथ सहित परिषद के कई सदस्य उपस्थित रहे।
