राजस्थान में जनगणना-2027 को लेकर तैयारियां अब तेज हो गई हैं। राज्य सरकार और प्रशासन ने जनगणना प्रक्रिया को डिजिटल और व्यवस्थित बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू करनी शुरू कर दी है। इस बार प्रदेश के हर मकान को एक यूनिक नंबर दिया जाएगा, जिससे मकान सूचीकरण और जनगणना का रिकॉर्ड अधिक सटीक और तकनीकी रूप से मजबूत बनाया जा सके।
ऑनलाइन स्व-गणना प्रक्रिया के बाद अब प्रदेशभर में डोर-टू-डोर सर्वे का कार्य शुरू कर दिया गया है। प्रशासन के अनुसार प्रगणक अब घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करेंगे और ऑनलाइन दर्ज आंकड़ों का सत्यापन भी करेंगे। जिन परिवारों ने अभी तक स्व-गणना नहीं की है, उनसे सीधे जानकारी ली जाएगी।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में अब तक करीब 15 लाख लोगों ने ऑनलाइन स्व-गणना पोर्टल पर अपनी जानकारी दर्ज कराई है। अधिकारियों ने इसे डिजिटल जनगणना की दिशा में बड़ा कदम बताया है।
प्रशासन के अनुसार 14 जून तक मकान सूचीकरण और मकान गणना का कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस दौरान प्रगणक प्रत्येक मकान तक पहुंचकर 33 सवालों के आधार पर जानकारी जुटाएंगे। सर्वे में परिवार के सदस्यों, मकान की स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं और सामाजिक-आर्थिक स्थिति से जुड़ी जानकारियां शामिल होंगी।
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राज्य के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने सभी जिला कलेक्टर्स और प्रशासनिक अधिकारियों को बेहतर कार्य के लिए बधाई दी है। उन्होंने कहा कि मात्र 15 दिनों में 15 लाख से अधिक हाउसहोल्ड्स द्वारा स्व-गणना पूरी करना बड़ी उपलब्धि है।
अधिकारियों का कहना है कि यूनिक मकान नंबरिंग सिस्टम लागू होने से भविष्य में सरकारी योजनाओं के संचालन, शहरी प्रबंधन, नागरिक सुविधाओं और प्रशासनिक कार्यों में काफी आसानी होगी। इससे डेटा प्रबंधन अधिक पारदर्शी और प्रभावी बन सकेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार डिजिटल तकनीक के जरिए की जा रही यह जनगणना भविष्य में राज्य की विकास योजनाओं, संसाधन प्रबंधन और सामाजिक योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
