बीकानेर। माइक्रो फाइनेंस कंपनी के नाम पर ऋण वितरण में धोखाधड़ी के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रमेश कुमार की अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। कोर्ट ने झुंझुनू निवासी विक्रम सिंह को विभिन्न धाराओं में दोषी मानते हुए पांच वर्ष के कारावास और 40 हजार रुपये के जुर्माने की सजा दी है। जुर्माना अदा नहीं करने पर अतिरिक्त सजा का प्रावधान भी रखा गया है।
यह मामला वर्ष 2010-11 का है, जब आरोपी एस.के.एस. माइक्रो फाइनेंस लिमिटेड में फील्ड असिस्टेंट के पद पर कार्यरत था। आरोप है कि उसने जरूरतमंद लोगों को ऋण दिलाने के नाम पर फर्जीवाड़ा किया। उसने 32 लोगों के लोन आवेदन तैयार करवाए और कंपनी से उनके नाम पर कुल 2,79,480 रुपये की राशि प्राप्त की, लेकिन यह राशि लाभार्थियों को न देकर स्वयं हड़प ली।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी 24 जनवरी 2011 से फरार हो गया था। बाद में फोन पर बातचीत के दौरान उसने धोखाधड़ी स्वीकार की। मामले में बीछवाल थाने में एफआईआर दर्ज की गई और पुलिस ने जांच के बाद आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
अभियोजन पक्ष ने अदालत में गवाहों और दस्तावेजों के आधार पर मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत किए, जिसके आधार पर कोर्ट ने आरोपी को दोषी करार दिया। अभियोजन की ओर से सहायक निदेशक गजेन्द्र सिंह राठौड़ ने पैरवी की।
