बीकानेर रियासत काल के पांच प्रमुख ऐतिहासिक दरवाजों में शामिल लाल पत्थर से निर्मित जस्सूसर गेट एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण बनता नजर आ रहा है। कभी शहर की पहचान रहा यह ऐतिहासिक प्रवेश द्वार आज अपनी ही सुरक्षा के लिए लगाए गए लोहे के चैनलों के सहारे खड़ा है, लेकिन विडंबना यह है कि अब ये चैनल भी खुद खतरा बन चुके हैं।
गेट के एक कोने पर लगा लोहे का चैनल उखड़कर करीब 70 डिग्री तक सड़क की ओर झुक गया है। इससे यहां से गुजरने वाले वाहनों और राहगीरों के लिए लगातार हादसे का अंदेशा बना हुआ है। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि करीब 15 दिन पहले एक बस की टक्कर से गेट की दीवार के पत्थर नीचे गिर गए थे और चैनल क्षतिग्रस्त हो गया, लेकिन इसके बाद न तो मरम्मत करवाई गई और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी ने मौके का निरीक्षण किया।
सीलन और गंदगी ने बढ़ाई चिंता
जस्सूसर गेट की दीवारों पर सीलन साफ नजर आ रही है। पास से गुजरने वाले नाले की नियमित सफाई नहीं होने से गंदगी, कीचड़ और दुर्गंध ने हालात और खराब कर दिए हैं। ऐतिहासिक धरोहर के आसपास पसरा कचरा न केवल यातायात में बाधा बन रहा है, बल्कि स्मारक की संरचना को भी नुकसान पहुंचा रहा है।
कानून सख्त, लेकिन अमल शून्य
चौंकाने वाली बात यह है कि जस्सूसर गेट को पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग द्वारा संरक्षित स्मारक घोषित किया गया है। मौके पर लगे सूचना बोर्ड में राजस्थान स्मारक, पुरावशेष स्थान तथा प्राचीन वस्तु अधिनियम, 1961 के तहत तीन साल की जेल या एक लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान दर्ज है।
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इसके बावजूद सवाल उठ रहे हैं कि जिस बस ने टक्कर मारकर गेट को नुकसान पहुंचाया, उस पर अब तक क्या कार्रवाई हुई। जब न कोई स्थायी निगरानी है और न ही कोई जिम्मेदार अधिकारी तैनात, तो ऐसे चेतावनी बोर्ड केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं।
जवाबों का इंतजार
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते मरम्मत और सुरक्षा के ठोस इंतजाम नहीं किए गए, तो यह ऐतिहासिक धरोहर किसी बड़े हादसे की वजह बन सकती है। जस्सूसर गेट अब केवल इतिहास की निशानी नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही का प्रतीक बनता जा रहा है।
