बीकानेर में खेजड़ी संरक्षण को लेकर चल रहे महापड़ाव में शामिल होने के लिए नोखा विधानसभा क्षेत्र में जबरदस्त जनउत्साह देखने को मिल रहा है। सूर्योदय के साथ ही सर्व समाज के लोग, विशेषकर बिश्नोई समाज से जुड़े गांवों से, सैकड़ों की संख्या में बीकानेर की ओर रवाना हुए। इस कूच में मातृशक्ति, बुजुर्ग, युवा और बच्चे सभी शामिल हैं, जो खेजड़ी बचाने के आंदोलन को अपना नैतिक दायित्व मानते हुए घरों से निकले हैं।
ठंड के मौसम की परवाह किए बिना बड़ी संख्या में बुजुर्गों का सड़कों पर उतरना आंदोलन के प्रति गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। ग्रामीणों का कहना है कि खेजड़ी केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि उनकी संस्कृति, परंपरा और जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा है, जिसे बचाने के लिए हर स्तर पर संघर्ष जरूरी है।
नोखा क्षेत्र के माडिया, सोमलसर, मुकाम, ककड़ा, जांगलू, पीथरासर, जेगला, रोड़ा, केशुपुरा, पांचू, सारुंडा, कक्कू, सलुंडीया, घट्टू, रासीसर, नोखा गांव, उड़सर, जसरासर सहित अनेक गांवों से परिवारों के साथ लोग बीकानेर महापड़ाव के लिए निकले हैं।
सुबह से ही बीकानेर की ओर जाने वाले बाइपास और शहर से गुजरने वाले प्रमुख मार्गों पर बसों और छोटे वाहनों की लंबी कतारें देखी गईं। वाहनों में सवार पर्यावरण प्रेमी भजन, सत्संग और खेजड़ी संरक्षण के संदेशों के साथ महापड़ाव स्थल तक पहुंचने को उत्साहित नजर आए।
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नोखा के पारवा टोल प्लाजा से अब तक हजारों वाहनों के गुजरने की सूचना है, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि महापड़ाव में भाग लेने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। यह जनभागीदारी खेजड़ी संरक्षण आंदोलन को नई ऊर्जा और व्यापक समर्थन देती दिखाई दे रही है।
