जल जीवन मिशन घोटाला: गवाहों की वीडियोग्राफी क्यों नहीं करवाई गई, कोर्ट ने ईडी से मांगा जवाब
जयपुर की आर्थिक अपराध मामलों की विशेष अदालत में जल जीवन मिशन घोटाले को लेकर पूर्व मंत्री महेश जोशी की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से जांच में बरती गई प्रक्रियागत लापरवाही पर सवाल उठाए।
पूर्व मंत्री महेश जोशी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वीआर बाजवा ने बहस करते हुए कहा कि ईडी ने गवाहों के बयानों की वीडियोग्राफी नहीं करवाई, जो मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के विपरीत है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ईडी की मंशा सिर्फ जोशी को अधिक समय तक हिरासत में रखना है।
सुनवाई के दौरान विशेष न्यायाधीश खगेंद्र कुमार शर्मा ने ईडी के अनुसंधान अधिकारी से पूछा कि क्या गवाहों की वीडियोग्राफी करवाई गई और जांच के लिए कितने कमरे उपलब्ध हैं। इस पर अधिकारी ने बताया कि उनके पास 35 कमरे हैं, लेकिन अधिकांश पहले से ही भरे हुए हैं।
- Advertisement -
कोर्ट ने इस उत्तर पर असंतोष जताया और कहा कि क्या दो वर्षों में एक भी कमरा उपलब्ध नहीं हो पाया? अनुसंधान अधिकारी ने जवाब देने के लिए समय मांगा, जिस पर अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 13 जून तय की।
ईडी की ओर से अधिवक्ता अजातशत्रु ने अदालत को बताया कि सह आरोपियों के अनुसार रिश्वत की राशि महेश जोशी तक पहुंचाई जाती थी। इसके अलावा आरोप है कि आरोपियों की एक फर्म ने जोशी के बेटे की कंपनी को लाखों रुपये का भुगतान किया। उनका कहना था कि जोशी की जमानत मंजूर की गई तो वह गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं।
जोशी के वकील ने अदालत में उठाए सवाल:
-
ईडी ने एक अभियंता को गवाह बनाया है, जबकि उसने खुद ठेकेदारों से रिश्वत ली है, फिर उसे आरोपी क्यों नहीं बनाया गया?
-
सुप्रीम कोर्ट द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में गवाहों की वीडियोग्राफी के निर्देशों का पालन क्यों नहीं हुआ?
-
जोशी के खिलाफ नोटिस जारी होने के एक साल तक कोई कार्रवाई नहीं की गई और फिर अचानक गिरफ़्तारी क्यों की गई?
इस मामले में अदालत अब 13 जून को आगे की सुनवाई करेगी, जिसमें ईडी को उपरोक्त सभी सवालों पर विस्तृत जवाब देना होगा।
