दहेज मांगना कानूनन अपराध है और सामाजिक कुप्रथा है, इसके बावजूद समाज में आज भी ऐसे कई परिवार व लोग हैं जो इस कानून की सरेआम धज्जियां उड़ाते हैं और उस कुप्रथा को बढ़ावा देते हुए नजर आते हैं, जिसको आज का समाज ‘अभिशाप’ मान रहा है। राजस्थान के अलवर जिले से एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जो इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब छाया हुआ है। मामला दहेज से जुड़ा हुआ है। जहां एमबीबीएस दूल्हे के द्वारा की गई डिमांड से न केवल पूरे परिवार की बेइज्जती हुई बल्कि बिना दुल्हन के वापस घर लौटना पड़ा।
जानकारी के अनुसार, दुल्हन के परिवार ने दूल्हे को दहेज में ब्रेजा कार दी, लेकिन एमबीबीएस दूल्हे को यह कार पसंद नहीं आई और मौके पर दुल्हन के परिवार से फॉर्च्यूनर गाड़ी की मांग कर डाली। इस मांग पर दूल्हा पूरी तरह से अड़ गया और कह दिया कि यह गाड़ी मिलेगी तो ही वह शादी करेगा। दो बजे का सावा था, जो दूल्हे की डिमांड के चलते निकलते जा रहा था। दुल्हन परिवार के लोगों ने दूल्हे के परिवार के लोगों के सामने लाख मिन्नतें की, लेकिन दूल्हा व उसके परिवार के लोग नहीं माने।
उसके बाद गांव के लोगों ने पंचायत बिठाकर दहेज और दुल्हन दोनों देने से इनकार कर दिया और कहा कि अब आपको न तो दुल्हन मिलेगी और न ही किसी प्रकार का दहेज। खाली हाथ वापस घर लौटना होगा। प्रशासन की मौजूदगी में पंचायती हुई और उस पंचायती में निर्णय लिया गया कि दूल्हे व उसके परिवार के लोग सार्वजनिक रूप से दुल्हन परिवार से माफी मांगेंगे, पांच लाख गायों के लिए दान और 73 लाख रुपए दुल्हन के परिवार को शादी का खर्च देंगे। पैसे रोकड़ नहीं होने पर दूल्हे का परिवार अपनी जमीन तीसरे व्यक्ति के पास एग्रीमेंट के साथ गिरवी रखेगा। इस तरह दूल्हे को न तो दुल्हन मिली और न ही फॉर्च्यूनर गाड़ी। बेइज्जती के साथ खाली हाथ घर लौटना पड़ा।
बता दें कि यह मामला पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। पंचायत द्वारा किए गए सामाजिक निर्णय की लोग खूब तारीफ कर रहे हैं। इस तरह के फैसले धन के भूखे भेड़ियों के लिए बड़ा सबक भी हैं।
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