वैदिक ज्योतिष के अनुसार 14 जुलाई से देवगुरु बृहस्पति अस्त होने जा रहे हैं। बृहस्पति को ज्ञान, धन, भाग्य, विवाह और संतान का कारक ग्रह माना जाता है। जब कोई ग्रह सूर्य के अत्यधिक निकट पहुंचता है तो वह अस्त हो जाता है। सामान्यतः गुरु के अस्त होने की अवधि को विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए शुभ नहीं माना जाता, लेकिन कुछ राशियों के लिए यह समय लाभ और प्रगति के नए अवसर लेकर आ सकता है।
वृषभ राशि:
वृषभ राशि के जातकों को करियर में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। नौकरी में पदोन्नति के योग बनेंगे और कार्यस्थल पर आपके काम की सराहना होगी। आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ बचत बढ़ सकती है और निवेश से भी लाभ मिलने की संभावना है।
मिथुन राशि:
मिथुन राशि वालों के लिए यह समय रुके हुए कार्य पूरे होने का संकेत दे रहा है। परिवार में चल रहे विवाद सुलझ सकते हैं और घर का माहौल बेहतर रहेगा। व्यापारियों को नई डील मिलने के योग हैं, जबकि नया कारोबार शुरू करने के लिए भी समय अनुकूल माना जा रहा है।
सिंह राशि:
सिंह राशि के लोगों को आर्थिक और सामाजिक दोनों क्षेत्रों में लाभ मिलने की संभावना है। मान-सम्मान बढ़ सकता है और पुराने निवेश या पैतृक संपत्ति से अचानक धन लाभ के संकेत मिल रहे हैं। निर्णय क्षमता मजबूत होने से कार्यों में सफलता मिल सकती है।
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धनु राशि:
धनु राशि के स्वामी स्वयं बृहस्पति हैं। इस दौरान लंबे समय से चल रहे कानूनी मामलों या कर्ज से राहत मिलने की संभावना है। स्वास्थ्य में सुधार और मानसिक तनाव में कमी महसूस हो सकती है। सकारात्मक बदलाव आपके आत्मविश्वास को भी बढ़ाएंगे।
शुभ उपाय:
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, गुरु अस्त काल में प्रत्येक गुरुवार भगवान विष्णु की पूजा करें, केसर का तिलक लगाएं और केले के वृक्ष में जल अर्पित करें। इससे गुरु ग्रह के शुभ प्रभावों में वृद्धि होने की मान्यता है।
