भारत सरकार के ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत बीकानेर में विद्यार्थियों को मृदा संरक्षण, टिकाऊ कृषि और पर्यावरणीय संतुलन के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (एनआरसीसी), बीकानेर द्वारा राजकीय डूंगर महाविद्यालय में किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और स्टाफ सदस्यों ने भाग लिया।
इस जागरूकता कार्यक्रम में कृषि, पर्यावरण और मृदा स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए और युवाओं को अभियान से जुड़ने का आह्वान किया।
मृदा संरक्षण की आवश्यकता पर जोर
कार्यक्रम के दौरान एनआरसीसी के वैज्ञानिकों ने रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के बढ़ते उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इनका अत्यधिक उपयोग केवल मिट्टी की गुणवत्ता को प्रभावित नहीं करता, बल्कि मानव और पशु स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर डालता है।
विशेषज्ञों ने कहा कि स्वस्थ मिट्टी ही सुरक्षित, पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण खाद्य उत्पादन की आधारशिला है।
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विद्यार्थियों को दी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी
वैज्ञानिकों ने विद्यार्थियों से अपील की कि वे किसानों और ग्रामीण समुदायों के बीच जागरूकता फैलाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। उनका कहना था कि यदि युवा वर्ग इस अभियान से जुड़ता है तो ‘खेत बचाओ अभियान’ को जन-आंदोलन का स्वरूप दिया जा सकता है।
कार्यक्रम में युवाओं को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को समाज तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया गया।
वैज्ञानिक कृषि अपनाने पर बल
कार्यक्रम में मृदा परीक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग और आधुनिक कृषि तकनीकों के महत्व पर भी चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाकर किसान उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ भूमि की उर्वरा शक्ति को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकते हैं।
उन्होंने कहा कि टिकाऊ कृषि पद्धतियां भविष्य की कृषि व्यवस्था को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएंगी।
पर्यावरण संरक्षण भी जरूरी
महाविद्यालय प्रशासन ने भी कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के महत्व पर अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में भूमि, जल और पर्यावरण की सुरक्षा समाज की साझा जिम्मेदारी बन चुकी है।
विद्यार्थियों को प्रकृति संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए जागरूक रहने का संदेश दिया गया।
अभियान को बताया समय की मांग
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि भारत सरकार का ‘खेत बचाओ अभियान’ मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसानों, विद्यार्थियों और समाज के विभिन्न वर्गों की सक्रिय भागीदारी से इस अभियान के उद्देश्यों को सफलतापूर्वक हासिल किया जा सकता है।
विद्यार्थियों ने सराहा आयोजन
कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थियों और स्टाफ सदस्यों ने अभियान को ज्ञानवर्धक और उपयोगी बताते हुए इसकी सराहना की। प्रतिभागियों ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम युवाओं को कृषि, पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
निष्कर्ष
राजकीय डूंगर महाविद्यालय में आयोजित ‘खेत बचाओ अभियान’ का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि युवाओं को मृदा संरक्षण और टिकाऊ कृषि के लिए प्रेरित करना भी रहा। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि स्वस्थ मिट्टी, सुरक्षित पर्यावरण और वैज्ञानिक कृषि ही भविष्य के समृद्ध भारत की नींव बन सकते हैं।
