बीकानेर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पीबीएम की स्वास्थ्य सेवाओं, संसाधनों की कमी और कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे “पीबीएम सुधारो जनआंदोलन” को अब प्रदेश स्तर पर राजनीतिक समर्थन मिलने लगा है। आंदोलन को राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी का समर्थन मिलने के बाद यह मुद्दा और अधिक चर्चा में आ गया है।
आंदोलन के तहत 30 जून को जिला कलेक्ट्रेट के घेराव की घोषणा की गई है, जिसमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष के शामिल होने की संभावना जताई गई है।
15 दिनों से जारी है आंदोलन
आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि पीबीएम अस्पताल में मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं, चिकित्सा संसाधनों की कमी और विभिन्न व्यवस्थागत समस्याओं को लेकर पिछले 15 दिनों से लगातार धरना-प्रदर्शन किया जा रहा है।
आंदोलनकारियों का आरोप है कि अस्पताल से जुड़े कई मुद्दों को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया गया, लेकिन अब तक अपेक्षित समाधान नहीं निकला है।
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कई बार सौंपे गए ज्ञापन
आंदोलन के दौरान अस्पताल प्रशासन, जिला प्रशासन और संभागीय स्तर के अधिकारियों को विभिन्न मांगों को लेकर कई बार ज्ञापन सौंपे गए हैं।
आंदोलनकारियों का कहना है कि उन्होंने अस्पताल में सुधार और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए 10 सूत्रीय मांगें रखी हैं। हालांकि, उनके अनुसार अब तक इन मांगों पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई है।
निष्पक्ष जांच की मांग
जनआंदोलन से जुड़े लोगों ने अस्पताल में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग भी उठाई है।
उनकी प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
- अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार
- संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना
- मरीजों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करना
- कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की जांच
- उच्च प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय करना
आंदोलनकारियों का कहना है कि पूरे मामले की जांच किसी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी की निगरानी में कराई जानी चाहिए।
30 जून को कलेक्ट्रेट घेराव
आंदोलन के अगले चरण के तहत 30 जून को जिला कलेक्ट्रेट का घेराव किया जाएगा। आयोजकों का दावा है कि इस कार्यक्रम में जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग शामिल होंगे।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों की भागीदारी को लेकर भी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
पीबीएम अस्पताल बना चर्चा का केंद्र
हाल के दिनों में पीबीएम अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। अस्पताल में सुविधाओं, चिकित्सा संसाधनों और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर विभिन्न संगठनों और सामाजिक समूहों ने भी चिंता व्यक्त की है।
इसी बीच अस्पताल से जुड़े मामलों की जांच के लिए प्रशासनिक स्तर पर समिति गठन की प्रक्रिया भी शुरू की जा चुकी है, जिससे आने वाले दिनों में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बढ़ी अपेक्षाएं
बीकानेर संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल होने के कारण पीबीएम अस्पताल पर लाखों लोगों की स्वास्थ्य सेवाएं निर्भर हैं। ऐसे में अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार की मांग को लेकर जनप्रतिनिधियों और आम लोगों की अपेक्षाएं लगातार बढ़ रही हैं।
निष्कर्ष
पीबीएम अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर शुरू हुआ जनआंदोलन अब राजनीतिक समर्थन मिलने के बाद नए चरण में पहुंच गया है। 30 जून को प्रस्तावित कलेक्ट्रेट घेराव के बाद यह मुद्दा और अधिक गर्मा सकता है। आंदोलनकारियों की मांग है कि अस्पताल में सुधार के साथ-साथ कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए।
