बीकानेर। शहर के चर्चित ‘मेड़तिया प्रकरण’ को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। इस पूरे मामले में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा दूरी बनाए रखने को लेकर कई तरह के राजनीतिक सवाल खड़े हो रहे हैं। एक तरफ जहां पार्टी संगठन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सक्रियता इस मामले में न के बराबर रही है, वहीं दूसरी तरफ वकीलों के समर्थन में बार काउंसिल मजबूती से आगे आया है।
भाजपा की ‘दूरी’ पर उठ रहे सवाल
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मामला संवेदनशील और प्रशासनिक रूप से विवादास्पद होने के कारण भाजपा नेतृत्व ने इसमें फूंक-फूंक कर कदम रखा है। पार्टी किसी भी ऐसे कानूनी या प्रशासनिक विवाद से बचना चाहती थी जिससे सरकार की छवि पर असर पड़े।
-
नेताओं की चुप्पी: स्थानीय स्तर पर आमजन का मानना है कि यदि भाजपा के पदाधिकारी इसमें सक्रिय भूमिका निभाते, तो प्रभावित पक्ष को संबल मिलता।
-
कानून मंत्री का बयान: तीन दिन पहले जब केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल से प्रेसवार्ता में इस पर सवाल हुआ, तो उन्होंने शहर अध्यक्ष सुमन छाजेड़ का नाम लेते हुए गेंद संगठन के पाले में डाल दी थी।
- Advertisement -
बार काउंसिल ने डीजीपी को लिखा पत्र: रखी ये मांगें
इस मामले में बार काउंसिल के कार्यवाहक सचिव विकास ढाका ने प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) को पत्र भेजकर निष्पक्षता की मांग की है। काउंसिल का कहना है कि मामला एक एडवोकेट से जुड़ा है, इसलिए पारदर्शिता बेहद जरूरी है। पत्र में मुख्य रूप से ये मांगें उठाई गई हैं:
-
वरिष्ठ अधिकारी से जांच: जांच किसी स्थानीय कनिष्ठ अधिकारी के बजाय अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) स्तर के वरिष्ठ अधिकारी को सौंपी जाए।
-
जल्दबाजी में कार्रवाई न हो: महज एफआईआर (FIR) दर्ज होने के आधार पर भगवान सिंह मेड़तिया के खिलाफ कोई दंडात्मक कदम न उठाया जाए।
-
तकनीकी साक्ष्यों की जांच: घटना के समय के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और स्वतंत्र गवाहों के बयानों की गहनता से जांच हो।
इससे पहले बीकानेर बार एसोसिएशन ने भी इस कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताते हुए उग्र आंदोलन की चेतावनी दी थी।
🔍 क्या था पूरा मामला?
यह पूरा विवाद कुछ दिनों पहले इंदिरा कॉलोनी में रात के समय लंबे समय तक बिजली गुल रहने से शुरू हुआ था।
-
बिजली कटौती से परेशान जनता की समस्या को लेकर भगवान सिंह मेड़तिया ने बिजली कंपनी बीकेसीईएल (BKCEL) के अधिकारियों का घेराव किया था।
-
मौके पर कानून-व्यवस्था संभालने पहुंची पुलिस टीम और वहां मौजूद एक नए आईपीएस (IPS) अधिकारी के साथ मेड़तिया की तीखी बहस (प्रशासनिक तनातनी) हो गई।
-
चर्चा है कि इसी गर्मागर्मी के बाद बिजली कंपनी को आगे कर बीछवाल थाने में मेड़तिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दी गई।
