बीकानेर में जहां एक ओर दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीकों की ओर तेजी से बढ़ रही है, वहीं शहर के कई इलाकों में बुनियादी ढांचे की कमियां अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। विशेष रूप से हाल के वर्षों में निर्मित सड़कों की स्थिति को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। पुराने और नए शहर के बीच का अंतर बारिश के दौरान साफ दिखाई देता है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पुराने शहर में भारी बारिश के बावजूद जलभराव की समस्या बहुत कम देखने को मिलती है, जबकि नई कॉलोनियों और विकसित क्षेत्रों में थोड़ी बारिश भी सड़कों को तालाब में बदल देती है। इसके पीछे सड़क निर्माण के दौरान लेवलिंग और जल निकासी व्यवस्था में बरती गई लापरवाही को प्रमुख कारण माना जा रहा है।
कई स्थानों पर सड़कें आसपास के मकानों और खाली प्लॉटों से ऊंची बना दी गई हैं, जिससे बारिश का पानी प्राकृतिक रूप से निकल नहीं पाता। वहीं नालियों का निर्माण या तो अधूरा है या उनका स्तर सड़क के अनुरूप नहीं है। परिणामस्वरूप पानी सड़कों पर जमा होकर लंबे समय तक बना रहता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी सड़क परियोजना में जल निकासी की वैज्ञानिक योजना बेहद जरूरी होती है। सड़क का ढाल, नालियों का स्तर और पानी के प्रवाह की दिशा यदि सही तरीके से निर्धारित न की जाए तो मामूली बारिश भी जलभराव का कारण बन सकती है। इससे न केवल लोगों को परेशानी होती है बल्कि सड़कों की गुणवत्ता और उनकी उम्र पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
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बारिश के मौसम में शहर की कई नई बस्तियों और कॉलोनियों से जलभराव की शिकायतें लगातार सामने आती हैं। इससे वाहन चालकों, राहगीरों और स्थानीय निवासियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कई जगहों पर पानी से भरे गड्ढे दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ा देते हैं, जिससे लोगों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
