राम मंदिर ट्रस्ट में कथित दान राशि गबन मामले की जांच अब और व्यापक होती नजर आ रही है। मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी केवल वित्तीय लेन-देन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह भी जांच करेगी कि कहीं किसी स्तर पर संरक्षण, लापरवाही या मिलीभगत तो नहीं हुई है।
सूत्रों के अनुसार, जांच का दायरा अब ट्रस्ट से जुड़े कुछ प्रभावशाली पदाधिकारियों और ट्रस्टियों तक भी बढ़ सकता है। बताया जा रहा है कि जिन पांच संदिग्धों के नाम सामने आए हैं, उनमें से कुछ के संबंध ट्रस्ट के अंदर प्रभावशाली लोगों से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है।
एसआईटी जांच का दायरा बढ़ा
इस मामले की जांच के लिए तीन वरिष्ठ अधिकारियों की एसआईटी गठित की गई है। टीम को प्रारंभिक रिपोर्ट सात दिनों में और विस्तृत अंतिम रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर सौंपने का निर्देश दिया गया है।
एसआईटी अब यह भी जांच करेगी कि कथित गबन की प्रक्रिया कब से चल रही थी, इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही और क्या किसी जिम्मेदार स्तर पर लापरवाही या अनदेखी के कारण यह संभव हुआ।
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ट्रस्ट अधिकारियों की भूमिका पर भी नजर
जांच एजेंसी इस पहलू की भी पड़ताल कर रही है कि क्या किसी ट्रस्टी या वरिष्ठ पदाधिकारी की जानकारी या मौन सहमति से यह गड़बड़ी संभव हुई। यदि जांच में किसी पदाधिकारी की संलिप्तता या गंभीर प्रशासनिक चूक के प्रमाण मिलते हैं, तो उनके अधिकारों को सीमित करने या अन्य कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।
हालांकि अधिकारियों का कहना है कि अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
ट्रस्ट के भीतर बढ़ी असहजता
मामले के सामने आने के बाद ट्रस्ट के भीतर असहज स्थिति बनती दिखाई दे रही है। सूत्रों का दावा है कि शीर्ष स्तर पर संवाद में दूरी बढ़ी है और आपसी संपर्क भी सीमित हो गया है।
यह भी चर्चा में है कि हाल के दिनों में एक प्रमुख ट्रस्टी और ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के बीच संपर्क स्थापित करने के प्रयास हुए, लेकिन अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली।
जांच पर देशभर की नजर
यह मामला संवेदनशील होने के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है। एसआईटी की जांच रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित गबन में किन लोगों की वास्तविक भूमिका रही और क्या प्रशासनिक चूक भी इसके लिए जिम्मेदार थी।
फिलहाल जांच जारी है और सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच एजेंसियां साक्ष्य एकत्र कर रही हैं।
