बीकानेर। शिक्षा विभाग में विभागीय जांचों के निस्तारण में हो रही देरी ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालात ऐसे हैं कि कुछ मामलों में जांच प्रक्रिया दशकों से पूरी नहीं हो सकी है, जिससे जहां दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई टलती रही, वहीं कई कार्मिक वर्षों तक अनिश्चितता और मानसिक दबाव झेलने को मजबूर हुए।
माध्यमिक शिक्षा विभाग के सीसीए-16 अनुभाग में वर्तमान में 425 विभागीय प्रकरण लंबित हैं। रिकॉर्ड के अनुसार इनमें कुछ मामले वर्ष 1989 से लंबित चले आ रहे हैं। लंबे समय तक कार्रवाई नहीं होने के कारण कई कर्मचारी सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं, जबकि उनकी फाइलें अब भी विभागीय स्तर पर अटकी हुई हैं।
लंबित मामलों के विश्लेषण से सामने आया है कि 192 प्रकरण ऐसे हैं जिनके निस्तारण में विभागीय स्तर की देरी प्रमुख कारण है। इनमें 155 मामलों में जांच रिपोर्ट अब तक प्राप्त नहीं हुई है या प्रकरण रिमांड पर लंबित हैं। इसके अलावा 24 मामलों में आरोप पत्र का जवाब आना बाकी है, जबकि 13 मामलों में जांच रिपोर्ट मिलने के बाद भी आगे की कार्रवाई नहीं हो सकी है।
जानकारों का मानना है कि न्यायालय या पुलिस स्तर पर लंबित मामलों में विभाग की भूमिका सीमित हो सकती है, लेकिन प्रभावी पैरवी और नियमित फॉलोअप के जरिए प्रक्रिया को गति दी जा सकती है। हालांकि कई मामलों में ऐसा नहीं होने से लंबित प्रकरणों की संख्या लगातार बढ़ती गई।
- Advertisement -
चिंताजनक तथ्य यह भी है कि केवल वर्ष 2024 से 2026 के बीच विभागीय स्तर पर 137 नए मामले लंबित श्रेणी में जुड़ गए हैं। इससे स्पष्ट है कि पुराने मामलों के निस्तारण के साथ-साथ नए प्रकरणों को समयबद्ध तरीके से निपटाने की व्यवस्था भी प्रभावी नहीं है।
