जयपुर। राजस्थान में राज्य कर्मचारियों के तबादलों पर लगी रोक को लेकर लंबे समय से चल रही चर्चाओं के बीच सरकार की ओर से सकारात्मक संकेत मिले हैं। मुख्यमंत्री आवास पर रविवार शाम आयोजित भाजपा विधायक दल की बैठक में तबादलों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। बैठक में कई विधायकों ने अपने क्षेत्रों में कर्मचारियों और आमजन की मांग का हवाला देते हुए तबादला प्रक्रिया शुरू करने की आवश्यकता जताई।
सूत्रों के अनुसार जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के समक्ष विभिन्न विभागों में कर्मचारियों की कमी और असंतुलित पदस्थापन का मुद्दा रखा। उन्होंने कहा कि कई कर्मचारी लंबे समय से तबादलों का इंतजार कर रहे हैं, जबकि कुछ क्षेत्रों में स्टाफ की कमी के कारण प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
विधायकों ने उठाई तबादले खोलने की मांग
बैठक के दौरान विधायकों ने बताया कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कर्मचारियों की नियुक्ति एवं स्थानांतरण को लेकर लगातार मांग उठ रही है। कई विभागों में कर्मचारियों की तैनाती संतुलित नहीं होने से आमजन को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जनप्रतिनिधियों ने सरकार से जल्द तबादला प्रक्रिया शुरू करने का आग्रह किया ताकि प्रशासनिक व्यवस्थाओं को बेहतर बनाया जा सके।
- Advertisement -
मुख्यमंत्री ने दिए सकारात्मक संकेत
बैठक में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने तबादलों के मुद्दे पर चर्चा करते हुए संकेत दिए कि राज्य सरकार 10 जून के बाद इस विषय पर कोई निर्णय ले सकती है। हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन मुख्यमंत्री के संकेतों को कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इन संकेतों के बाद विभिन्न कर्मचारी संगठनों और सरकारी कर्मचारियों के बीच तबादलों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
लंबे समय से लगी है तबादलों पर रोक
राज्य सरकार ने प्रशासनिक कारणों से कर्मचारियों के तबादलों पर रोक लगा रखी है। इसके चलते विभिन्न विभागों के हजारों कर्मचारी लंबे समय से तबादला नीति खुलने का इंतजार कर रहे हैं।
कर्मचारी संगठनों की ओर से भी समय-समय पर सरकार से तबादला प्रक्रिया शुरू करने की मांग की जाती रही है। उनका कहना है कि लंबे समय से एक ही स्थान पर कार्यरत कर्मचारियों को राहत मिलनी चाहिए।
हजारों कर्मचारियों को मिल सकती है राहत
यदि सरकार तबादलों की अनुमति देती है तो प्रदेशभर के हजारों कर्मचारियों को राहत मिल सकती है। साथ ही जनप्रतिनिधियों को भी अपने क्षेत्रों में प्रशासनिक व्यवस्थाओं को मजबूत करने में सहायता मिलेगी।
फिलहाल कर्मचारियों, कर्मचारी संगठनों और जनप्रतिनिधियों की निगाहें 10 जून के बाद सरकार द्वारा लिए जाने वाले संभावित निर्णय पर टिकी हुई हैं।
