बीकानेर। केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वे देश में अराजकता का माहौल बनाने का प्रयास करते हैं। मेघवाल ने कहा कि राहुल गांधी केवल देश के भीतर ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने वाले बयान देते रहते हैं।
बीकानेर में मीडिया से बातचीत के दौरान मेघवाल ने कहा कि लोकतंत्र में आलोचना का अधिकार सभी को है, लेकिन देश की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाले बयानों को उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने राहुल गांधी से अपने हालिया बयानों पर पुनर्विचार करने की बात भी कही।
सांसद हनुमान बेनीवाल के हालिया विवादित बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में मर्यादा का विशेष महत्व होता है और किसी भी जनप्रतिनिधि द्वारा अमर्यादित भाषा का प्रयोग स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ऐसी भाषा और व्यवहार का विरोध किया जाना चाहिए।
मेघवाल ने हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के राजस्थान दौरे को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास के लिए केंद्र सरकार नई योजनाओं और नीतियों पर काम कर रही है। साथ ही सीमा सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में भी कई अहम कदम उठाए जा रहे हैं।
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गौरतलब है कि बिचून रीको औद्योगिक क्षेत्र के विरोध में चल रहे आंदोलन के तहत भैराणा गांव में एक महापंचायत का आयोजन किया गया था, जिसमें राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सांसद हनुमान बेनीवाल भी शामिल हुए थे। इस दौरान दिए गए उनके कुछ बयानों को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई।
महापंचायत में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को लेकर बेनीवाल की ओर से की गई टिप्पणियों पर कई नेताओं ने आपत्ति जताई है। राजस्थान सरकार के मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने भी इन बयानों की आलोचना करते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों को अपने पद की गरिमा और भाषा की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक मंचों पर इस प्रकार की भाषा लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं मानी जा सकती।
इससे पहले भी अर्जुनराम मेघवाल राहुल गांधी के कुछ बयानों को लेकर प्रतिक्रिया दे चुके हैं। उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ इस्तेमाल की गई आपत्तिजनक भाषा के लिए राहुल गांधी को देश से माफी मांगनी चाहिए। मेघवाल का कहना था कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो जनता इसका जवाब लोकतांत्रिक तरीके से देगी।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच नेताओं की भाषा और मर्यादा को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। विभिन्न दलों के नेता सार्वजनिक जीवन में संयमित और जिम्मेदार वक्तव्यों की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं।
