बीकानेर जिला कलेक्ट्रेट सभागार में शुक्रवार को अतिरिक्त जिला कलक्टर (प्रशासन) सुरेश कुमार यादव की अध्यक्षता में जिला पर्यावरण समिति, इको टूरिज्म, प्रदूषण नियंत्रण और वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में पर्यावरण संरक्षण, सिंगल यूज प्लास्टिक पर नियंत्रण, वायु प्रदूषण और पर्यटन विकास जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक में पॉलीथिन और सिंगल यूज प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग पर चिंता जताते हुए इसके प्रभावी नियंत्रण के लिए कई अहम निर्णय लिए गए। अधिकारियों ने कहा कि प्लास्टिक कचरे के कारण शहर की स्वच्छता और पर्यावरण दोनों प्रभावित हो रहे हैं, इसलिए जागरूकता के साथ सख्ती भी जरूरी है।
प्रदूषण नियंत्रण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी राजकुमार मीणा ने बताया कि जिले में कहीं भी सिंगल यूज प्लास्टिक के उत्पादन की सूचना देने वाले व्यक्ति को 15 हजार रुपये और इसके स्टॉक की जानकारी देने वाले को 10 हजार रुपये का इनाम दिया जाएगा। सूचना देने वाले का नाम और मोबाइल नंबर पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा। इसके लिए नगर निगम, नगर परिषद, नगर पालिका और प्रदूषण नियंत्रण मंडल कार्यालय में शिकायत की जा सकती है। साथ ही सहायक अभियंता के मोबाइल नंबर 8723058586 पर भी सूचना दी जा सकेगी।
बैठक में निर्णय लिया गया कि पॉलीथिन के उपयोग को कम करने के लिए कपड़े के थैलों का वितरण किया जाएगा। स्कूलों और गांवों में जागरूकता अभियान चलाकर बच्चों और आमजन को सिंगल यूज प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी दी जाएगी। सभी सरकारी कार्यालयों में ऐसे साइन बोर्ड लगाने के निर्देश भी दिए गए, जिनमें यह दर्शाया जाएगा कि वहां सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग नहीं होता।
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प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारियों ने बताया कि प्लास्टिक बोतलों के निस्तारण के लिए जिला अस्पताल परिसर में लगभग 40 लाख रुपये की लागत से रिवर्स वेंडिंग मशीन लगाई गई है। इसके अलावा देशनोक स्थित श्री करणी माता मंदिर परिसर में भी यह मशीन स्थापित की जा चुकी है, जहां जल्द बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराया जाएगा।
बैठक में शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण पर भी चिंता जताई गई। अधिकारियों ने बताया कि बीकानेर में सड़कों पर उड़ने वाली धूल, वाहन प्रदूषण और औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाला धुआं वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है। सामान्य दिनों में शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स 100 से 150 के बीच रहता है, जबकि सर्दियों में यह 200 के पार पहुंच जाता है।
वन विभाग के अधिकारियों ने जानकारी दी कि पिछले छह महीनों में जिले में मोर शिकार के केवल तीन मामले दर्ज हुए हैं। वन्यजीव गणना के अनुसार जिले में लगभग 7 हजार मोर मौजूद हैं। वहीं जिले में संचालित 40 आरा मशीनों में से केवल 7 के नवीनीकरण की जानकारी भी बैठक में सामने आई।
उपवन संरक्षक जी. वैंकटेश ने बताया कि मिशन हरियालो राजस्थान के तहत वन विभाग की नर्सरियों से विभिन्न विभाग ‘हरियालो राजस्थान एप’ के माध्यम से पौधों की प्री-बुकिंग कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि सरकारी नर्सरियों में कुल पौधों का 20 प्रतिशत हिस्सा रोहिड़े के पौधों के लिए आरक्षित रहेगा।
पर्यटन विभाग के संयुक्त निदेशक अनिल राठौड़ ने कहा कि जोड़बीड़ और आरडी 682 जैसे पर्यटन स्थलों पर यदि वन विभाग वॉच टावर और बैठने की सुविधाएं विकसित करता है, तो पर्यटन विभाग की ओर से 2 करोड़ रुपये तक की परियोजनाएं स्वीकृत की जा सकती हैं।
बैठक में वन विभाग, प्रदूषण नियंत्रण मंडल, पर्यटन विभाग, शिक्षा विभाग, उद्योग विभाग और जिला परिषद सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया।
