बीकानेर में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री Arjun Ram Meghwal ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर विपक्षी दलों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले इस कानून का विरोध कर विपक्ष ने अपनी सोच स्पष्ट कर दी है।
महिलाओं के अधिकारों पर राजनीति का आरोप
मेघवाल ने कहा कि जब देश में महिलाओं को राजनीतिक रूप से मजबूत बनाने का ऐतिहासिक अवसर आया, तब विपक्षी दलों ने सहयोग करने के बजाय भ्रम फैलाने और प्रक्रिया में बाधा डालने का प्रयास किया। उनके अनुसार, यह रवैया महिलाओं के अधिकारों के प्रति असंवेदनशीलता को दर्शाता है।
‘महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम’
उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम केवल एक विधेयक नहीं, बल्कि देश की करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है। इस कानून के जरिए महिलाओं की राजनीति में भागीदारी बढ़ेगी और उन्हें निर्णय प्रक्रिया में मजबूत स्थान मिलेगा।
2029 से लागू होने का प्रावधान
केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह अधिनियम संसद से पारित होकर कानून बन चुका है और इसे वर्ष 2029 से लागू करने की योजना है। उन्होंने कहा कि देशभर की महिलाओं ने इसे सकारात्मक रूप से स्वीकार किया है।
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प्रधानमंत्री के नेतृत्व का जिक्र
मेघवाल ने Narendra Modi के नेतृत्व में महिलाओं के लिए किए गए विभिन्न फैसलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण के लिए काम कर रही है और यह कानून उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
विपक्ष पर लगाए गंभीर आरोप
उन्होंने विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उन्होंने इस महत्वपूर्ण कानून का समर्थन नहीं कर महिलाओं के हितों के खिलाफ काम किया। मेघवाल ने कहा कि वर्षों तक केवल राजनीतिक लाभ के लिए मुद्दों को टाला गया, जबकि वर्तमान सरकार ने ठोस कदम उठाए हैं।
राजनीतिक माहौल में बयानबाजी तेज
इस बयान के बाद एक बार फिर नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर सियासी बहस तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। आने वाले समय में इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और बढ़ सकते हैं।
