बीकानेर जिले के नापासर क्षेत्र में वर्ष 2020 में हुई ज्वैलरी दुकान लूट के मामले में अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। सबूतों की कमी और गवाहों के पलटने के कारण यह मामला कमजोर पड़ गया, जिसके चलते अदालत ने आरोपितों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।
यह फैसला न्यायाधीश Vinod Kumar Gupta की अदालत में सुनाया गया। इस मामले में अरुण, राधेश्याम, जयकिशन, बालकिशन, रामदयाल, भरत कुमार और पवन सहित सभी आरोपियों को राहत मिली है।
घटना का पूरा विवरण
यह मामला 17 जून 2020 का है, जब खारड़ा गांव में ज्वैलरी की दुकान चलाने वाले नंदकिशोर ने रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। शिकायत के अनुसार, कुछ लोग कारों में सवार होकर आए और हथियार दिखाकर करीब 2.5 लाख रुपये नकद के साथ सोने-चांदी के आभूषण लूटकर फरार हो गए।
घटना के बाद पुलिस ने डकैती, घर में घुसकर अपराध और अवैध हथियार रखने जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू की थी और बाद में आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया गया।
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गवाहों के मुकरने से बदला केस
सुनवाई के दौरान मामला उस समय पलट गया, जब खुद परिवादी और अन्य गवाह अपने पहले दिए गए बयानों से मुकर गए। नंदकिशोर ने अदालत में कहा कि वह आरोपियों की पहचान नहीं कर सकता, जबकि अन्य गवाहों ने भी घटना की पुष्टि नहीं की।
इसके अलावा, बरामदगी को लेकर पुलिस और गवाहों के बयानों में भी विरोधाभास सामने आया, जिससे अभियोजन पक्ष की स्थिति कमजोर हो गई।
अदालत का फैसला
अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि आरोपियों की पहचान स्पष्ट रूप से साबित नहीं हो सकी। साथ ही, लूट के सामान और हथियार की बरामदगी भी संदेहास्पद रही। ऐसे में सभी आरोपितों को बरी कर दिया गया।
बचाव पक्ष की भूमिका
आरोपियों की ओर से अधिवक्ता गणेश चौधरी, विनय त्रिपाठी, संजय गौतम, रामरतन गोदारा, संजय रामावत और सदीक मोलानी ने पैरवी की।
यह मामला एक बार फिर दर्शाता है कि आपराधिक मामलों में गवाहों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होती है। गवाहों के मुकरने से मजबूत केस भी कमजोर हो सकता है।
