अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहां दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सटीकता या सफलता की गारंटी नहीं देते हैं। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।
3 मार्च 2026 को होली के दिन साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। यह खगोलीय घटना इसलिए भी खास है क्योंकि रंगों के पर्व के साथ ‘ब्लड मून’ का अद्भुत दृश्य देखने को मिलेगा। देशभर में लोग यह जानने को उत्सुक हैं कि आज ग्रहण कितने बजे लगेगा, सूतक काल कब से रहेगा और उनके शहर में यह नजारा किस समय दिखाई देगा।
क्यों कहा जाता है ‘ब्लड मून’?
जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं और पृथ्वी की छाया पूरी तरह चंद्रमा पर पड़ती है, तब पूर्ण चंद्र ग्रहण होता है। इस दौरान पृथ्वी के वायुमंडल से छनकर आने वाली सूर्य की लाल किरणें चंद्रमा तक पहुंचती हैं, जिससे वह गहरा लाल दिखाई देता है। इसी कारण इसे ‘ब्लड मून’ कहा जाता है।
ग्रहण का समय और सूतक काल
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्र ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है।
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सूतक काल प्रारंभ: सुबह 06:23 बजे
ग्रहण प्रारंभ: दोपहर 03:20 बजे
पूर्णता (टोटैलिटी): लगभग 58 मिनट तक
ग्रहण समाप्ति: शाम 06:46 बजे
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार सूतक काल में पूजा-पाठ और शुभ कार्यों से परहेज किया जाता है। कई मंदिरों में इस दौरान कपाट बंद रखे जाते हैं।
भारत में कब दिखेगा लाल चांद?
भारत में चंद्रमा शाम को उदित होता है, इसलिए ग्रहण का अंतिम चरण अधिक स्पष्ट दिखाई देगा।
पूर्वोत्तर भारत जैसे असम और अरुणाचल प्रदेश में चंद्रमा जल्दी निकलने के कारण बेहतर दृश्यता रहेगी।
दिल्ली, मुंबई, जयपुर, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे शहरों में शाम करीब 6:20 से 6:30 बजे के बीच लालिमा लिए चंद्रमा दिखाई देगा।
पश्चिमी राज्यों में आंशिक दृश्यता देखने को मिलेगी।
ग्रहण देखने के लिए सुझाव
चंद्र ग्रहण को नंगी आंखों से सुरक्षित देखा जा सकता है, इसके लिए विशेष चश्मे की जरूरत नहीं होती।
पूर्व दिशा में खुला आसमान चुनें, जहां से चंद्रमा का उदय साफ दिख सके।
शहर की रोशनी से दूर किसी ऊंची छत या खुले मैदान में दृश्य अधिक स्पष्ट नजर आएगा।
होली और ग्रहण का दुर्लभ संयोग
ज्योतिषीय दृष्टि से होली के दिन पूर्ण चंद्र ग्रहण का संयोग दुर्लभ माना जाता है। कई विद्वान इसे विशेष खगोलीय घटना के रूप में देख रहे हैं। हालांकि वैज्ञानिक दृष्टि से यह एक सामान्य खगोलीय प्रक्रिया है।
अगला पूर्ण चंद्र ग्रहण
ऐसी घटनाएं हर वर्ष नहीं होतीं। यदि इस बार का दृश्य छूट जाए तो अगले पूर्ण चंद्र ग्रहण के लिए कुछ समय इंतजार करना पड़ सकता है।
अस्वीकरण: यह जानकारी सामान्य खगोलीय और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है। धार्मिक या ज्योतिष संबंधी किसी भी निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।
