बीकानेर। राजस्थान में 1 जनवरी से जनगणना प्रक्रिया की औपचारिक तैयारी शुरू हो गई है। इसके तहत राज्य की सभी प्रशासनिक इकाइयों को फ्रीज कर दिया गया है। अब नए जिले, उपखंड, तहसील, गांव, शहरी निकाय या वार्ड बनाने के साथ-साथ उनकी सीमाओं में किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया जा सकेगा। यह प्रतिबंध जनगणना का काम पूरा होने तक, यानी मई–जून 2027 तक प्रभावी रहेगा।
सीमाओं में बदलाव पर पूरी तरह रोक
जनगणना के नियमों के अनुसार, जिले से लेकर गांव और शहर के वार्ड तक की सीमाएं तय समय पर स्थिर रखी जाती हैं, ताकि जनसंख्या गणना में कोई असमानता न आए। इसी क्रम में राजस्थान में सभी प्रशासनिक इकाइयां 31 दिसंबर की स्थिति के अनुसार ही मान्य रहेंगी। जनगणना पूरी होने से पहले किसी भी स्तर पर सीमा परिवर्तन की अनुमति नहीं होगी।
गृह मंत्रालय की अधिसूचना के बाद हटेगी रोक
इस रोक को हटाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय की अधिसूचना आवश्यक होगी। इससे पहले मंत्रालय ने 31 दिसंबर तक नई प्रशासनिक इकाइयों के गठन की अस्थायी अनुमति दी थी, लेकिन नए साल से यह छूट समाप्त हो गई है। अब जनगणना की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही किसी नए जिले या प्रशासनिक ढांचे पर निर्णय लिया जा सकेगा।
लाखों कर्मचारियों के तबादलों पर भी ब्रेक
प्रशासनिक सीमाओं के साथ-साथ जनगणना से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादलों पर भी रोक लगा दी गई है। अगले करीब सवा साल तक कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार, शहरी निकायों के आयुक्त, शिक्षक, पटवारी, ग्राम सचिव और अन्य संबंधित कार्मिकों का ट्रांसफर सामान्य परिस्थितियों में नहीं किया जाएगा। केवल विशेष और असाधारण हालात में ही तबादलों की अनुमति दी जा सकेगी।
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फरवरी से शुरू होगी जनगणना प्रशिक्षण प्रक्रिया
सूत्रों के अनुसार, फरवरी महीने से जनगणना से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों का प्रशिक्षण शुरू किया जाएगा। इस बड़े प्रशासनिक अभ्यास में राज्यभर से दो लाख से अधिक अधिकारी और कर्मचारी लगाए जाएंगे। घर-घर जाकर आंकड़े जुटाने के लिए करीब 1.60 लाख प्रगणकों की तैनाती होगी, जबकि 30 से 40 हजार के बीच सुपरवाइजर और अन्य अधिकारी निगरानी की भूमिका में रहेंगे।
प्रशासनिक व्यवस्था स्थिर रखने पर जोर
सरकार का मानना है कि जनगणना जैसी व्यापक प्रक्रिया के दौरान प्रशासनिक स्थिरता बेहद जरूरी होती है। इसी कारण सीमाओं में बदलाव और तबादलों पर रोक लगाई गई है, ताकि आंकड़े सटीक और भरोसेमंद तरीके से जुटाए जा सकें।
राज्य के लिए अहम प्रक्रिया
जनगणना के आंकड़ों के आधार पर भविष्य में विकास योजनाएं, संसाधनों का आवंटन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व तय होता है। ऐसे में यह रोक न केवल प्रशासनिक दृष्टि से, बल्कि राज्य के दीर्घकालिक नियोजन के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
