बीकानेर। अनामिका (महिला अस्तित्व जागृति) फाउंडेशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजु गुप्ता कछावा ने जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक नया संवैधानिक सुधार प्रस्ताव सार्वजनिक किया है। इस पहल के तहत चुनावी वादे पूरे नहीं करने वाले सांसदों और विधायकों के खिलाफ कार्रवाई के लिए एक स्वतंत्र ‘जनप्रतिनिधि उत्तरदायित्व आयोग’ बनाने की मांग की गई है।
डॉ. मंजु ने बताया कि चुनाव के दौरान किए गए वादों के उल्लंघन की शिकायतों की सुनवाई के लिए वर्तमान में कोई स्वतंत्र संवैधानिक व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। इसी कमी को दूर करने के लिए फाउंडेशन ने एक विस्तृत श्वेतपत्र जारी करते हुए आयोग आधारित ‘राइट टू रिकॉल’ प्रणाली का प्रस्ताव रखा है।
प्रस्ताव के अनुसार यह आयोग केवल चुनावी वचनभंग से जुड़े मामलों की जांच करेगा। शिकायत मिलने पर संबंधित जनप्रतिनिधि और शिकायतकर्ता दोनों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। यदि जांच में गंभीर और प्रमाणित वचनभंग साबित होता है, तो आयोग संबंधित सांसद या विधायक को पद से हटाने की अनुशंसा या कार्रवाई करने में सक्षम होगा।
डॉ. मंजु ने स्पष्ट किया कि यह प्रस्ताव सरकार गिराने या किसी राजनीतिक दल के अस्तित्व को प्रभावित करने के लिए नहीं है। इसका उद्देश्य केवल जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही बढ़ाना और चुनावी घोषणापत्रों के प्रति गंभीरता सुनिश्चित करना है।
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फाउंडेशन ने इस विषय पर तैयार श्वेतपत्र को सार्वजनिक चर्चा के लिए जारी किया है और नागरिकों, विधि विशेषज्ञों तथा सामाजिक संगठनों से सुझाव और समर्थन देने की अपील की है।
