बीकानेर की विशेष न्यायालय (एनडीपीएस एक्ट) ने ड्रग्स तस्करी, फर्जी भारतीय दस्तावेजों के उपयोग और अवैध रूप से भारत में रहने के मामले में ईरान के तीन नागरिकों को दोषी ठहराते हुए पांच-पांच वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने तीनों पर कुल 3.30 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना जमा नहीं करने की स्थिति में प्रत्येक दोषी को नौ-नौ महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
विशेष न्यायालय (एनडीपीएस एक्ट) के पीठासीन अधिकारी प्रमोद बंसल ने फैसला सुनाते हुए कहा कि मादक पदार्थों की तस्करी एक अंतरराष्ट्रीय समस्या है और ऐसे अपराधों पर सख्ती से नियंत्रण रखना समाज और देश की सुरक्षा के लिए आवश्यक है।
वर्ष 2023 में हुई थी कार्रवाई
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 5 फरवरी 2023 को नयाशहर थाना पुलिस के तत्कालीन एसएचओ वेदपाल सिवरान गश्त के दौरान मुक्ताप्रसाद पुलिस चौकी पहुंचे। इसी दौरान तकनीकी इनपुट और खुफिया सूचना के आधार पर नापासर और नाल थाना पुलिस के सहयोग से एक संदिग्ध टोयोटा कोरोला आल्टिस कार को रोका गया।
तलाशी के दौरान कार से विभिन्न राज्यों की दो लोहे और चार प्लास्टिक की फर्जी नंबर प्लेटें बरामद हुईं। कार में ईरान के तीन नागरिक सवार थे, जिनके बारे में पुलिस ने जोधपुर निवासी सुनील बिश्नोई के साथ मिलकर तस्करी नेटवर्क संचालित करने की आशंका जताई थी।
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तलाशी में मिला गांजा, अफीम और फर्जी दस्तावेज
पुलिस जांच के दौरान होशियार मोहम्मद के बैग से 34.10 ग्राम गांजा, ईरानी पासपोर्ट, फर्जी भारतीय आधार कार्ड और 45 हजार रुपये नकद बरामद हुए।
वहीं सलमान उर्फ शहराम जक्री के पास से 35 ग्राम अफीम, ईरानी पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, फर्जी भारतीय आधार कार्ड और 43 हजार रुपये मिले।
तीसरे आरोपी अहमद जिहाई बहले के कब्जे से फर्जी दस्तावेज, सिम कार्ड और 34 हजार रुपये नकद बरामद किए गए। जांच में सामने आया कि तीनों विदेशी नागरिक भारत में वैध अनुमति के बिना रह रहे थे और भारतीय पहचान पत्रों का अवैध उपयोग कर रहे थे।
20 गवाहों के बयान के बाद आया फैसला
मामले में पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर न्यायालय में चालान पेश किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 20 गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए।
सभी साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने तीनों ईरानी नागरिकों को दोषी करार दिया। वहीं, साक्ष्यों के अभाव में जोधपुर निवासी सुनील बिश्नोई को दोषमुक्त कर दिया गया। मामले में राज्य सरकार की ओर से हरीश भट्टड़ ने पैरवी की।
