जयपुर। राजस्थान सरकार शहरी विकास परियोजनाओं के लिए भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को सरल और तेज बनाने की तैयारी में है। नगरीय विकास विभाग नई ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स (टीडीआर) नीति के अंतिम मसौदे पर काम कर रहा है। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद सड़कों के चौड़ीकरण, पार्क, ग्रीन एरिया और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के लिए अधिग्रहित भूमि के बदले नकद मुआवजा देने के स्थान पर भूमि मालिकों को डिजिटल टीडीआर सर्टिफिकेट प्रदान किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि नई नीति से एक ओर सरकारी खजाने पर तत्काल वित्तीय बोझ कम होगा, वहीं दूसरी ओर मुआवजे और कानूनी विवादों के कारण वर्षों तक अटकी रहने वाली विकास परियोजनाओं को भी गति मिलेगी।
टीडीआर प्रणाली के तहत भूमि मालिक को उसकी अधिग्रहित जमीन के मूल्य के बराबर विकास अधिकार दिए जाएंगे। यह अधिकार डिजिटल सर्टिफिकेट के रूप में होगा, जिसे भविष्य में संपत्ति विकास के दौरान अतिरिक्त निर्माण क्षेत्र प्राप्त करने या आवश्यकता पड़ने पर दूसरे डेवलपर को हस्तांतरित कर आर्थिक लाभ लेने के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा।
उदाहरण के तौर पर, यदि किसी सड़क परियोजना के लिए आपकी जमीन का एक हिस्सा अधिग्रहित होता है और उसके बदले आपको 20,000 वर्गफीट का टीडीआर सर्टिफिकेट मिलता है, तो आप भविष्य में अपनी किसी अन्य जमीन पर निर्धारित सीमा से अधिक निर्माण की अनुमति इस सर्टिफिकेट के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं। इससे भूमि मालिकों को नकद मुआवजे के बजाय एक दीर्घकालिक और मूल्यवान विकास अधिकार उपलब्ध होगा।
