बीकानेर में प्रस्तावित ई-बस सेवा शुरू होने से पहले ही इसके रूट विस्तार को लेकर मांग उठने लगी है। सामाजिक संस्था रमक झमक ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से ई-बसों का संचालन नाल से आगे कोडमदेसर तक करने की मांग की है। संस्था का कहना है कि इससे श्रद्धालुओं के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को भी बेहतर परिवहन सुविधा मिल सकेगी।
रमक झमक संस्था के अध्यक्ष प्रहलाद ओझा भैरूं ने बताया कि वर्तमान में ई-बसों के लिए नाल और महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय तक रूट प्रस्तावित किए गए हैं, लेकिन इन बसों को कोडमदेसर तक विस्तारित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोडमदेसर स्थित भैरवनाथ मंदिर क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
उन्होंने बताया कि शहर के गंगानगर चौराहा, डूडी पेट्रोल पंप, नाल और आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों लोग नियमित रूप से कोडमदेसर जाते हैं। यदि ई-बस सेवा को वहां तक बढ़ाया जाता है तो यात्रियों को निजी वाहनों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और आवागमन अधिक सुगम हो जाएगा।
प्रहलाद ओझा ने कहा कि कोडमदेसर तक ई-बस संचालन से ग्रामीण क्षेत्र के निवासियों को भी सीधा लाभ मिलेगा। उन्हें शहर आने-जाने के लिए सुरक्षित, सस्ती और पर्यावरण अनुकूल परिवहन सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
- Advertisement -
उन्होंने यह भी बताया कि बड़ी संख्या में लोग वर्तमान में बाइक और अन्य निजी वाहनों का उपयोग कर मंदिर तक पहुंचते हैं। यदि सार्वजनिक परिवहन की सुविधा उपलब्ध होती है तो पेट्रोल और डीजल की खपत में कमी आएगी, जिससे प्रदूषण नियंत्रण में भी मदद मिलेगी।
संस्था की ओर से इस संबंध में पत्र लिखकर जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से मांग की गई है कि वे ई-बस रूट निर्धारण में कोडमदेसर को शामिल कराने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं। उनका कहना है कि यह कदम धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ आमजन की परिवहन संबंधी समस्याओं का भी समाधान करेगा।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन और संबंधित विभाग इस मांग पर क्या निर्णय लेते हैं और प्रस्तावित ई-बस सेवा के अंतिम रूट में कोडमदेसर को शामिल किया जाता है या नहीं।
