राजस्थान सरकार ने वन विभाग में पिछले दो दशकों के दौरान विकास कार्यों पर हुए खर्च और भुगतानों की जांच के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य के वन मंत्री संजय शर्मा के निर्देश पर अलवर, अजमेर और बीकानेर वन मंडलों में वर्ष 2004-05 से 2023-24 तक किए गए भुगतानों की जांच के लिए विशेष समितियों का गठन किया गया है।
जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई 19 मई को जारी निर्देशों के बाद की गई है। वन मंत्री ने वन प्रभागों में विकास कार्यों के लिए किए गए भुगतानों की विस्तृत जांच कराने के आदेश दिए थे। यह मामला विराटनगर विधायक कुलदीप धनखड़ द्वारा उठाई गई शिकायत के बाद सामने आया, जिसमें उन्होंने अलवर सहित अन्य वन मंडलों में विकास कार्यों और वित्तीय लेन-देन की व्यापक जांच की मांग की थी।
धनखड़ ने आरोप लगाया था कि वर्ष 2004 में नकद भुगतान पर रोक लगाने के बावजूद अलवर वन मंडल में बड़े पैमाने पर नकद लेन-देन जारी रहे। उन्होंने यह भी दावा किया कि वर्तमान में चल रही जांच केवल वर्ष 2015-16 से 2023-24 तक सीमित है, जबकि 2004-05 से 2014-15 के बीच की अवधि को जांच से बाहर रखा गया है।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन बल प्रमुख) अरिजीत बनर्जी द्वारा जारी आदेशों के तहत गठित समितियां वर्ष 2004-05 से 2023-24 तक के विकास कार्यों और उनसे जुड़े भुगतानों की समीक्षा करेंगी। विभागीय अधिकारियों के अनुसार समितियों को अपनी रिपोर्ट एक महीने के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
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वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह जांच प्रक्रिया का पहला चरण है। आगामी चरणों में राज्य के अन्य वन प्रभागों को भी जांच के दायरे में शामिल किया जा सकता है।
इधर, पर्यावरण मामलों के अधिवक्ता तपेश्वर सिंह ने आशंका जताई है कि नई जांच प्रक्रिया से अलवर वन मंडल में वर्ष 2021 से 2024 के दौरान कथित वित्तीय अनियमितताओं की चल रही जांच प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि अग्रिम मृदा कार्यों में लगभग 20 करोड़ रुपये की कथित अनियमित निकासी से जुड़े मामले में पहले ही दो जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की जा चुकी हैं, जबकि एक रिपोर्ट अभी लंबित है।
राज्य सरकार का कहना है कि जांच का उद्देश्य विकास कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और वित्तीय प्रक्रियाओं की समीक्षा करना है। अब सभी की निगाहें गठित समितियों की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे आने वाले समय में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
