बीकानेर के राजकीय डूंगर महाविद्यालय में विद्यार्थियों के लिए जर्मन भाषा सीखने का सुनहरा अवसर उपलब्ध होने जा रहा है। आयुक्तालय, कॉलेज शिक्षा, जयपुर के निर्देशानुसार राज्य सरकार की फॉरेन लैंग्वेज कम्युनिकेशन स्किल स्कीम के तहत महाविद्यालय में जर्मन भाषा का सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया जाएगा।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राजेंद्र पुरोहित ने बताया कि इस पहल से बीकानेर और आसपास के क्षेत्र के विद्यार्थियों को विदेशी भाषा सीखने का अवसर मिलेगा, जिससे उनके कौशल विकास के साथ-साथ रोजगार और उच्च शिक्षा के नए अवसर भी खुलेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना विद्यार्थियों के भविष्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
प्राचार्य ने बताया कि जर्मन भाषा का यह सर्टिफिकेट कोर्स इंग्लिश एंड फॉरेन लैंग्वेजेज यूनिवर्सिटी (EFLU), हैदराबाद द्वारा लाइव एवं ऑनलाइन मोड में संचालित किया जाएगा। कोर्स के लिए इच्छुक अभ्यर्थी महाविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट से आवेदन पत्र डाउनलोड कर सकते हैं।
आवेदन पत्र आवश्यक दस्तावेजों के साथ 13 जून 2026 तक महाविद्यालय के कक्ष संख्या 22 में जमा करवाना होगा। आवेदन पत्र 6 जून 2026 की शाम से कॉलेज की वेबसाइट पर उपलब्ध रहेगा। साथ ही निर्धारित शुल्क जमा करने के बाद फीस रसीद को आवेदन पत्र के साथ संलग्न करना अनिवार्य होगा।
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कौन कर सकता है आवेदन?
राज्य पोषित विश्वविद्यालयों एवं राजकीय महाविद्यालयों में अध्ययनरत या पूर्व में नियमित विद्यार्थी रहे स्नातक और स्नातकोत्तर विद्यार्थी इस कोर्स के लिए आवेदन कर सकते हैं। इनके लिए 1,000 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है।
वहीं निजी विश्वविद्यालयों और निजी महाविद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए 2,000 रुपये शुल्क तय किया गया है।
इसके अतिरिक्त राजस्थान के 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग के ऐसे निवासी, जिन्होंने नियमित विद्यार्थी के रूप में कक्षा 12 उत्तीर्ण की है, वे भी आवेदन कर सकते हैं। हालांकि इनके आवेदन तभी स्वीकार किए जाएंगे जब निर्धारित सीटों में स्थान रिक्त रहेगा। इस श्रेणी के लिए भी 2,000 रुपये शुल्क निर्धारित है।
केवल 30 सीटें उपलब्ध
महाविद्यालय प्रशासन के अनुसार कोर्स में अधिकतम 30 सीटें उपलब्ध हैं। चयनित विद्यार्थियों के लिए नियमित उपस्थिति अनिवार्य होगी। कोर्स से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश और पात्रता की जानकारी महाविद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध करवाई गई है।
यह पहल विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने और विदेशी भाषाओं के माध्यम से करियर के नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
