बीकानेर। जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों और कृषि भूमि की बिगड़ती सेहत को ध्यान में रखते हुए बीकानेर जिले में एक माह का विशेष ‘खेत बचाओ अभियान’ शुरू किया गया है। कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके) और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) संस्थानों के संयुक्त प्रयास से संचालित यह अभियान 1 जून से 30 जून तक ग्राम स्तर पर चलेगा। अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को टिकाऊ खेती, मिट्टी संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग के प्रति जागरूक बनाना है।
संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) मदनलाल ने बताया कि कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना भी आज की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुकी है। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग, जैविक विकल्पों को अपनाना और वैज्ञानिक खेती पद्धतियों का समावेश ही भविष्य की खेती को सुरक्षित बना सकता है। उनके अनुसार स्वस्थ मिट्टी, संरक्षित जल संसाधन और जागरूक किसान ही कृषि समृद्धि की मजबूत नींव हैं।
अभियान के दौरान कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार किसानों को रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने तथा खेत पर तैयार जैविक आदानों के उपयोग के लिए प्रेरित किया जाएगा। साथ ही पारंपरिक कृषि ज्ञान और आधुनिक तकनीकों के समन्वय को बढ़ावा देकर खेती को अधिक लाभकारी और पर्यावरण अनुकूल बनाने पर जोर दिया जाएगा। अभियान की निगरानी और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संबंधित सहायक कृषि अधिकारियों को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
सहायक निदेशक (उद्यान) मुकेश गहलोत ने बताया कि ग्राम स्तर पर आयोजित कृषक गोष्ठियों और संवाद कार्यक्रमों में किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती, मिट्टी परीक्षण, जल संरक्षण तकनीकों, फसल सुरक्षा उपायों, समन्वित कृषि प्रबंधन, उपयुक्त फसल चक्र और कृषि मशीनरी के वैज्ञानिक उपयोग के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही कृषि एवं उद्यानिकी विभाग की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी किसानों तक पहुंचाई जाएगी ताकि वे सरकारी सुविधाओं का अधिकतम लाभ उठा सकें।
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अभियान में कृषि विज्ञान केन्द्र बीकानेर और लूणकरनसर के विशेषज्ञों के साथ आईसीएआर के वैज्ञानिक भी सक्रिय भागीदारी निभाएंगे। वैज्ञानिक सीधे किसानों से संवाद कर उन्हें बदलते मौसम के अनुरूप खेती की रणनीतियों, मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के उपायों तथा लागत कम कर उत्पादन बढ़ाने के व्यावहारिक तरीकों के बारे में मार्गदर्शन देंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच खेती को टिकाऊ बनाने के लिए ऐसे जागरूकता अभियानों की महत्वपूर्ण भूमिका है। खेत बचाओ अभियान किसानों को आधुनिक तकनीक और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग के प्रति प्रेरित करते हुए कृषि क्षेत्र को अधिक सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
